जो युद्ध के कारोबारी हैं, उनका सीजन बारहों महीना रहता है। इस धंधे ने मंदी कभी जाना ही नहींं। इस सेक्टर में इतना ज्यादा काम है कि किसी की सांसें रोकने के लिए इन्हें सांस लेने की भी फुर्सत नहीं है। हथियार के इस धंधे में मांग के अनुसार उत्पादन नहीं किया जाता बल्कि उत्पादन के अनुसार मांग पैदा कराई जाती है। कुरकुरे और मिसाइल ऐसी सामग्री है कि जिसके मुंह लग गई फिर उसको यही चाहिए ही चाहिए। अबोध उसे लेने के लिए मचल जाते हैं। जो सियाणे हैं वो बेचते हैं, जो अबोध हैं वो खरीदते हैं।
बाजार में होली की सामग्री, दीवाली की सामग्री, ईद की सामग्री की कमी नहीं होती उसी प्रकार युद्ध की सामग्री से भी बाजार भरे पड़े रहते हैं। इसकी भी घर पहुंच सेवा है। जरूर इसमें भी एक मिसाइल के साथ एक मिसाइल फ्री की स्कीम चल रही होगी। सेल्समैन कह रहा होगा कि अब पाएं प्रत्येक बम पर बीस प्रतिशत अतिरिक्त विनाश। युद्ध के जो शौकीन होते हैं उन्होंने आग की लपटों, शहर से उठते हुए धुएं के गुबारों के बीच एक सम्मोहक वाक्य की रचना की है कि हम युद्ध शांति के लिए कर रहे हैं। युद्ध में योजना के मुताबिक बच्चों की स्कूल और अस्पताल में बमबारी करते हैं फिर कहते हैं यह गलती से हो गया।
युद्ध की वजह दो प्रकार की होती है एक तो अघोषित होती है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं और दूसरी वजह होती तो अघोषित है, लेकिन उसके बारे हर खास ओ आम आदमी जानकारी रखते हैं। असल मसला असलाह है। युद्ध हथियारों का प्रदर्शन है। अगर दस देशों को हथियार बेचने हो तो एक देश पर हमला करना जरूरी हो जाता है। यह उत्पादन का डिमास्टेशन है। इसमें हमले की वीडियो नहीं बनाई जाती बल्कि वीडियो बनाना है, इसलिये हमला किया जाता है। इस युद्ध में झूठी खबरें भी हथियार होती हैं।
जो युद्ध के शौकीन देश होते हैं उनके बूढ़े मुखिया के दिमाग में चौबीसों घंटे युद्ध चलता रहता है। एक युद्ध से फारिग होते हैं तो दूसरे युद्ध की योजना शुरू कर देते हैं। बिना युद्ध के ज्यादा दिन नहीं रह सकते। इनके लिए युद्ध वीडियो गेम है खेलने में मजा भी आता है और अच्छा टाईम पास भी हो जाता है। शायरी और कविता से दोस्तों की महफिल लूटी जा सकती है लेकिन जो दुनियां को लूटना है तो हथियार चाहिए। बदले हुए समीकरण में हथियार वाला लूटता है और विचारधारा वाला लुटता है। जो असहमत हैं वे भी समझ रहे हैं कि यही सच्चाई है।
अब तो हर घर में पार्किंग से ज्यादा जरूरी बंकर हो गए। अब मकान के वही नक़्शे पास होना चाहिए, जिसमें बंकर हो। अब विज्ञापन में बिल्डर यह नहीं कहेंगे कि इसमें जिम है, स्वीमिंग पुल है, अस्पताल और रेलवे स्टेशन से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी है, बल्कि अब मुख्य आकर्षण यह होगा कि इसमें बंकर है। आप सब अपना और अपने परिवार का ख्याल रखिये। इसके लिए जरूरी है कि आपका अमेरिका जैसा दुश्मन और चीन जैसा दोस्त न हो वरना आप दोहरी मार झेलेंगे।

