जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। मामला हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत के डूबने से जुड़ा है। आरोप है कि श्रीलंका के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी ने इस जहाज पर हमला किया। राहुल गांधी ने इस घटना पर प्रधानमंत्री की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए हैं।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि पश्चिम एशिया का संघर्ष अब भारत के दरवाजे तक पहुंच गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता छोड़ दी है। राहुल ने कहा कि ऐसे समय में देश को एक स्थिर नेतृत्व की जरूरत है। उन्होंने लिखा, ‘यह संघर्ष हमारे घर तक आ गया है, हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत डूब गया है। फिर भी प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा। इसके बजाय, भारत के पास समझौता करने वाला प्रधानमंत्री है जिसने हमारी रणनीतिक स्वायत्तता छोड़ दी।’
ईरानी युद्धपोत आईरिस देना हाल ही में विशाखापत्तनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026 (IFR) और MILAN 2026 में हिस्सा लेकर अपने देश लौट रहा था। भारत ने इसे इन कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।
राहुल गांधी ने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण भारत की तेल आपूर्ति को खतरे में बताया। उन्होंने कहा कि देश का तेल आयात खतरे में है क्योंकि इसका 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है। उन्होंने एलपीजी और एलएनजी की स्थिति को और गंभीर बताया।
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कहा कि यह जहाज भारत के बुलावे पर अभ्यास में शामिल हुआ था और अमेरिकी हमले ने भारत की संवेदनशीलता की अनदेखी की। सिब्बल के मुताबिक, जहाज निहत्था था क्योंकि ऐसे अभ्यासों में जहाज गोला-बारूद लेकर नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि यह हमला सुनियोजित था, क्योंकि अमेरिका को जहाज की मौजूदगी की जानकारी थी। अमेरिका को भी अभ्यास में बुलाया गया था, लेकिन उसने आखिरी समय में नाम वापस ले लिया। सिब्बल ने कहा कि भारत की नैतिक जिम्मेदारी बनती है क्योंकि ये हमारे मेहमान थे।
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी है। उन्होंने लिखा कि अमेरिका को अपनी इस कार्रवाई पर पछताना पड़ेगा। अराघची ने कहा, “अमेरिका ने ईरान के तट से 2,000 मील दूर समुद्र में एक घिनौना अपराध किया। भारतीय नौसेना के मेहमान, फ्रिगेट देना पर बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया।”
अराघची का बयान अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ के उस बयान के बाद आया जिसमें उन्होंने अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी जहाज को डुबोने की पुष्टि की थी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका को इस घटना पर गहरा पछतावा होगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी जहाज पर लगभग 180 लोग सवार थे। श्रीलंका की नौसेना ने 87 शव बरामद किए और 32 लोगों को बचाया। बचाए गए लोगों को गाले शहर के अस्पताल में भर्ती कराया गया।

