Saturday, April 4, 2026
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सेंट फ्रांसिस स्कूल के बाहर रोज लगता है जाम

  • पुलिस कब करेगी इनके खिलाफ कार्रवाई?

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: कंकरखेड़ा में थाने से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित सेंट फ्रांसिस स्कूल ने जाम की समस्या से दिक्कत ही दिक्कत उत्पन्न कर रखी है। स्कूल की छुट्टी होने के बाद यहां भयंकर जाम लगता है। जाम लगने के कारण यह रोड बंद हो जाती है। जिसके चलते घंटों तक लोगों को चिलचिलाती धूप और तपती गर्मी में खड़े होने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

बढ़ती भीड़ के कारण यहां आए दिन हादसे भी होते रहते हैं, लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी पुलिस आज तक स्कूल प्रबंधक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाई है। स्कूल प्रबंधन द्वारा इस जाम से निजात दिलाने के लिए आज तक कोई भी ऐसे कदम नहीं उठाए गए हैं। जिससे जाम से निजात मिल सके। स्कूल में सुबह साढ़े सात बजे बच्चों के आने का समय है। दोपहर में डेढ़ बजे स्कूल की छुट्टी होती है। अक्सर दोनों समय स्कूल के बाहर जाम लग जाता है।

जाम लगने का मुख्य कारण है। स्कूल के बाहर पार्किंग न होना और पार्किंग के स्थान पर स्कूल प्रबंधक द्वारा फुलवाड़ी लगा देना है। स्कूल प्रबंधक द्वारा इस जाम से छुटकारा दिलाने के लिए भी कोई प्रयोग नहीं किया। जिसके चलते जाम लग जाता है। वहीं, इस संबंध में कंकरखेड़ा इंस्पेक्टर योगेश शर्मा का कहना है कि जाम की समस्या उनके संज्ञान में है। पुलिस कर्मियों को यहां लगाकर इस समस्या से निजात दिलाई जाएगी।

कई बार की लोगों ने शिकायत

स्थानीय लोगों ने जाम की समस्या को लेकर स्कूल की प्रिंसिपल और थाना पुलिस से शिकायत की, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। आरोप यहां तक है कि स्कूल की प्रिंसिपल इस समस्या को लेकर स्थानीय लोगों से मिलती तक नहीं है।

स्कूली वाहन लगाते हैं जाम

स्कूल के बाहर जब छुट्टी होती है तो वाहन रोड पर खड़े रहते हैं। जिसके चलते जाम लग जाता है। जाम लगने के कारण भीड़ अधिक होने से यहां हादसे भी होते रहते हैं। आए दिन मारपीट की घटनाएं भी यहां होती रहती है। पुलिस द्वारा आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

आरटीओ में बिना दलालों के नहीं होता कोई काम

मेरठ: संभागीय परिवहन विभाग में लंबे समय से दलालों का बोलबाला है, इस वजह से यहां आम जनता का काम बिना दलालों के नहीं होता। आरटीओ कार्यालय में निजी या व्यवसायिक किसी भी वाहन से जुड़े काम कराना आम जनता के लिए टेढ़ी खीर साबित होता है। लोन समाप्त होने के बाद नई आरसी लेनी हो या वाहन किसी दूसरे के नाम होना हो यहां तक कि लाइसेंस के लिए आॅनलाइन एप्लाई करने के बाद भी आसानी से काम नहीं होता, लेकिन यदि काम कराने के लिए किसी दलाल की मदद ली जाती है तो सबकुछ आसानी से हो जाता है।

कई लोगों ने पहचान छिपाने की शर्त पर बताया उनके वाहन का लोन पूरा हो चुका है, अब नई आरसी जारी करने के लिए सभी कागजी कार्रवाई पूरी की जा चुकी है, लेकिन पिछले डेढ़ माह से आरसी जारी नहीं की जा रही है। इसी तरह पुराना वाहन खरीदने के बाद उसे अपने नाम कराने के लिए भी महीनों चक्कर लगवाए जा रहे हैं। विभाग के कर्मचारी कहते हैंकि उनके पास पुरानी फाइलें निकालवाने के लिए स्टाफ नहीं है, बिना फाइल निकले काम कैसे होगा। यही काम किसी दलाल के द्वारा कराया जाता है तो वह इसके लिए एक से दो हजार रुपये सुविधा शुल्क के रूप में लेकर आसानी से आरसी जारी करा देता है।

दलाल के लिए फाइल भी उपलब्ध हो जाती है, क्योंकि आरटीओ कार्यालय का स्टाफ केवल दलालों के चेहरे ही पहचानता है। यदि आम आदमी किसी खिड़की पर जाता है तो उसे परेशान किया जाता है। यहां भ्रष्टाचार की जड़े कितनी गहरी है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार को सेना के दो जवान दुपहिया वाहन ट्रांसफर के लिए पहुंचे, लेकिन उन्हें भी घंटों परेशान किया गया। दलाल कार्यालय के किसी भी विभाग में आसानी से प्रवेश कर लेते हैं।

कई बार यह खिड़की के बाहर से ही अपना चेहरा दिखा देते है जिसके बाद उनका काम हो जाता है। वहीं, इस संबंध में आरटीओ हिमेश तिवारी का कहना है कि विभाग में स्टॉफ की कुछ कमी है, लेकिन उसे हम किसी तरह मैनेज कर रहे हैं। फाइल निकालने के लिए भी मैन पावर की कमी है, लेकिन यह विभाग का अंदरुनी मामला है, इसमें ज्यादा समस्या नहीं है।

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