- टोपी, बनियान, बैग और वस्तुओं के दाम छू रहे आसमान
जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: गत 14 जुलाई से सावन का महीना शुरू हो गया है। इसी के साथ विभिन्न प्रदेशों से बाबा भोले के भक्त कांवड़ लेकर जनपद से गुजरने लगे हैं। लेकिन इस बार भोले के भक्तों को एक न दिखाई देने वाली समस्या से भी दो चार होना पड़ रहा है। वह है मंहगाई की। महंगाई के चलते कांवड यात्रा में उपयोग में होने वाली हर वस्तु के दाम पहले से अधिक हो चुके हैं। ऐसे में भक्तों को अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी।
कोरोना के चलते दो साल तक कांवड यात्रा पर रोक थी। लेकिन इस साल कोरोना के कम प्रकोप के चलते सरकार ने कांवड़ यात्रा की इजाजत दी है। इसके चलते इस बार लाखों की तादाद में कांवडियों के आने की उम्मीद है। हालांकि कांवड़िए रास्ते में लगने वाले विभिन्न शिविरों में ठहरते हैं। साथ ही शिविरों में भोजन आदि की व्यवस्था भी होती है। लेकिन कांवड़ में इस्तेमाल होने वाले सामान पर महंगाई का असर है।
जनपद के प्रसिद्ध हौजरी उद्योग ने भी कांवड़ यात्रा को लेकर खासी तैयारियां की हैं। कांवड़ यात्रा में भगवा रंग की टी शर्ट,गमछे, लॉवर, दुपट्टे,कैपरी आदि की खासी डिमांड रहती है। कारोबारी राधेश्याम नारंग का कहना है कि चूंकि दो साल तक कांवड यात्रा पर रोक थी। इस कारण इस साल कारोबार के अच्छा होने की उम्मीद है। हालांकि कच्चे माल के दाम बढ़ने से लागत भी बढ़ चुकी है। जो टीशर्ट पहले 200 से 300 रुपये तक आती थी। उसकी कीमत अब करीब चार सौ रुपये तक जा पहुंची है। इसी के साथ लॉवर भी 300 से 500 रुपये तक में बिक रहा है।
हालांकि इस बार जनपद में अन्य प्रदेशों हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और दिल्ली से भी आर्डर प्राप्त हुए हैं। कांवड यात्रा में इस बार टोपी, बनियान, बैग और चश्मों की भारी डिमांड है। इसी के साथ कांवड यात्रा में सबसे ज्यादा महत्व रखने वाली कांवड पर भी मंहगाई की मार है। इस बार छीके वाली कांवड पांच सौ से 600 रुपये के बीच उपलब्ध है। जबकि टोकरी वाली कांवड इस बार 750 रुपये तक की है। तो वहीं एक मंजिला कांवड करीब हजार रुपये की है। इसी के साथ दो मंजिला कांवड करीब 3500 तथा तीन मंजिला कांवड की कीमत 4500 रुपये तक है।

