Wednesday, March 4, 2026
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थंडरस्टॉर्म, झमाझम और भीगी-भीगी गड़बड़

सूचना क्रांति ने जर्रे -जर्रे को तरह- तरह की खबरों से इस कदर भर दिया है कि चारों ओर ब्रेकिंग न्यूज का ओवरफ्लो दिखता है। सच तो यह है कि आज का अनुभूत सच गूगल से उठा ली गयी सेकंड हैण्ड जानकारियों का जमावड़ा है। वे विद्वान, जिन्हें अपना वजूद जानने को जीपीएस खंगालना पड़ता है, अपने शाब्दिक वाणों से सरकार को सरपट दौड़ाने की कोशिश में लगे रहते हैं। अब कुछ भी ऐसा नहीं बचा जिसे गोपनीय कहा जा सके। मौसम की भविष्यवाणी इतनी सटीक कि उसके निर्धारित समयानुसार लोग प्याज कतरने और बेसन घोलने का काम शुरू करते है। अब कन्फ्यूजन केवल शब्दावली को लेकर है। मौसम विभाग कहता है, थंडरस्टॉर्म लेकिन न कोई गड़-गड़,न कोई तड़-तड़,सिर्फ झमाझम और भीगीभागी गड़बड़। अब कहते हैं कि मन भीग जाता है, पर तरबतर होने को देह थोड़ी पड़ जाती है।

यमुना का जल खतरे के निशान के आसपास पहुंच जाने की पुख्ता खबर है। इससे दिल्ली वालों पर रत्ती भर फर्क नहीं पड़ता। फिलहाल उनकी चिंता अवमानना और क्षमायाचना के इर्द-गिर्द लगातार दोलन कर रही है। कहने वाले कहते घूम रहे कि घड़ी के भीतर फिसलती वक्त की बालू इतिहास रचने को तत्पर है। मजाकिया लोगों का कहना है कि जब अवमानना होनी थी, हो गयी। जो बीत गया वो बीत गयी। बात-बात पर बात का बतंगड़ कोई क्यों बनाएं? क्षमायाचना भी तो कुलमिला कर सॉरी का हिंदी वर्जन ही है, कह दिया तो कह दिया, नहीं कहा तो भी क्या।

दिल्ली में निचले इलाकों में रहने वाले बाढ़ के द्वारा किए जाने वाले सालाना उत्पात के लिए कमर कसे लगभग तैयार बैठे हैं। ऊंचे दर्जे की कॉलोनियों में रहने वालों के लिए यह संभावित जलसा है। जलथल जब एक होगा तब सरकार द्वारा आसमान में उड़ते हेलीकॉप्टर से बाढ़ पीड़ितों की थाह ली जाएगी। जगह-जगह राहत सामग्री को नेपथ्य में रख नेताजी के भीमकाय कटआउट लगेंगे। इतना सब हो लेने के उपरांत यदि जरूरत महसूस हुई तो इधर-उधर थोड़ी-बहुत राहत सामग्री भी टपका दी जाएगी। साथ ही साथ बाढ़जी से विनम्र निवेदन किया जाएगा कि जो हुआ, बहुत हुआ, अब तुम चुपके से उतर लो। अन्यथा हम तुम्हें चुल्लू में भर-भर कर अन्यत्र उलीच देंगे।

सयाने कह गए हैं कि अनुनय विनय से बिगड़े हुए अधिकतर काम बन जाते हैं। इससे जटिल परिस्थिति में फंसा आदमी भी बिना जग हंसाई कराये दबे पांव पतली गली से बच निकलता है। सब जानते हैं कि भीषण आपदा में खुद को बचा ले जाने का हुनर कायरता नहीं माना जाता। बात तो सही समय पर उपयुक्त शब्दावली के प्रयोग की है। आज नहीं तो कल यह बहता हुआ जिद्दी पानी अपने चिन्ह छोड़ता खतरे के निशान के आरपार निकल जाएगा। समय चाहे कितनी भी आशंकाओं से भरा हो, देर या सवेर बीत जाएगा। आपको अपने कार्य फोकस करना होगा और दूसरों के मामलों में ज्यादा ना बोले, नहीं तो वह आपको कुछ भला बुरा बोल सकते हैं।

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