Monday, April 6, 2026
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जीएम सरसों की वैज्ञानिक मंजूरी से टिकैत परेशान

  • कहा, जीएम सरसों के इस्तेमाल से लोगों में बढ़ेंगी बीमारियां, सरकार ने लिया कृषि कानूनों से भी बड़ा काला फैसला

जनवाणी संवाददाता |

मुजफ्फरनगर: जीएम सरसों को सरकार द्वारा प्रमोट किये जाने की खबर को लेकर भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता ने गहरी चिन्ता व्यक्त की है और सरकार के इस फैसले को तीन कृषि कानूनों से भी बड़ा काला फैसला बताया है, जो किसानों के साथ-साथ आम लोगों की भी जिन्दगी बर्बाद कर देगा।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने ट्वीटर पर एक वीडियो जारी की है, जिसमें उन्होंने कहा कि
एक खबर बड़ी तेजी से चल रही है, जिसके अनुसार भारत सरकार जीएम सरसों को परमोट करने जा रही है। इसका भारतीय किसान यूनियन पूरा विरोध करेगी, क्योंकि इस तरह की फसलें देश में नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार साइंस एण्ड टैक्नालाॅजी से परमिशन लेकर भारत में जीएम सरसों को प्रमोट करने जा रही है। जीएम सरसों को बोने के लिए सरकार इसे किसानों के बीच में जारी करेगी। उन्होंने बताया कि भारत में सरसों का एक बड़ा क्षेत्र है। भारत का एक बड़ा हिस्सा अपने खाने के तेल में सरसों के तेल का इस्तेमाल होता है।

अगर यह जीएम जैसा जहरीला सरसों हमारी थाली में आयेगा, तो इसके भयंकर परिणाम होंगे। चारों तरफ बीमारियां बढ़ेंगी। सरकार के पास में जीएम और नाॅन जीएम सरसों को पृथक करने का कोई साधन नहीं है। इस सरसों के खिलाफ 400 साइंटिस्टों की रिपोर्ट हैं, उनकी कोई एप्रूवल नहीं ली गयी और जनता से भी इसका कोई एप्रूवल नहीं लिया गया है। भारतीय किसान यूनियन इसका पुरजोर विरोध करेगी।

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