नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉट कॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनन्दन है। हर वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जानकी जयंती मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन माता सीता ने पृथ्वी पर मानव के रूप में जन्म लिया था। इस दिन भगवान राम और माता सीता की पूजा की जाती है।

धार्मिक मान्यता है कि माता सीता की पूजा करने से जीवन में सुख, सौभाग्य और शांति की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही भक्तों को रोग, शोक और संताप से मुक्ति मिलती है। इस दिन को सीता अष्टमी, जानकी व्रत के नाम से भी जाना जाता है।
जानकी प्रकट पर्व कथा
रामायण में बताया गया है कि राजा जनक को ऋषि मुनियाें ने सलाह दी कि वे प्रजा को अकाल से बचाने के लिए स्वयं खेत में हल चलाएं। राजा जब अपने खेत में हल चलाने लगे। जमीन के भीतर एक मटके में बालिका मिलीं। राजा ने उसे अपनी पुत्री माना जिसे मां जानकी कहा जाता है।
अष्टमी तिथि शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि आरंभ- सुबह 8 बजकर 15 मिनट से (13 फरवरी 2023)
अष्टमी तिथि समापन- सुबह 7 बजकर 40 मिनट पर (14 फरवरी 2023)
उदया तिथि अनुसार जानकी जयंती की तिथि- 14 फरवरी 2023

सीता अष्टमी का विशेष महत्व विवाहित महिलाओं के लिए माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन विवाहित स्त्रियां यदि व्रत रखकर भगवान राम और माता सीता की पूजा करती हैं तो उनके वैवाहिक जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और का लंबी उम्र होती है। वहीं अगर कुंवारी कन्याएं सीता अष्टमी का व्रत रखती हैं तो उनके विवाह में आ रही सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
जानकी व्रत पूजा विधि
जानकी व्रत के दिन सुबह स्नान आदि के बाद माता सीता की हल्दी, चन्दन और कुमकुम से पूजा करें। इसके बाद उनके आगे घी का दीपक जलाएं और श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ाएं। फिर मां जानकी को किसी मीठी चीज का भोग लगाएं। मां सीता को पीली चीजों का भोग लगाना चाहिए। माता सीता की आरती करें। इसके बाद ‘श्री जानकी रामाभ्यां नमः’ मंत्र का 108 बार जप करें। सुहागिन महिलाएं सीता अष्टमी का व्रत भी रख सकती हैं। शाम के वक्त पूजा करने के बाद ही अपना व्रत खोलें। सीता जयंती के दिन दान का भी विशेष महत्व है।

