
कर्नाटक का चुनाव दिलचस्प होता जा रहा है। चुनाव में केवल 8 दिन बचे हैं, पर अभी से लगता है कि यह चुनाव मोदी और अमित शाह के लिए आसान नहीं रह गया है? उनकी हालत वाकई खराब होने का अंदाजा इससे भी लग रहा है कि चुनाव नतीजों का अंदाजा लगाने वाले ज्यादातर सर्वेक्षणों में भाजपा को बहुमत से दूर दिखाया जा रहा है। चुनावी सर्वेक्षण तकनीकी रूप से बेहद कमजोर होते हैं और सत्ता के साथ खड़े मीडिया की बाकी खबरों की तरह ही सत्ता के पक्ष में किए जाते हैं। इनमें किए गए सवाल पक्षपातपूर्ण होते हैं और इनका उद्देश्य सता पक्ष की छवि को चमकाना होता है। पर इन सर्वेक्षणों में भी भाजपा को बहुमत से दूर दिखाया जाना पार्टी के लिए अशुभ संकेत हैं। इन सर्वेक्षणों में कुछ त्रिशंकु विधानसभा के आसार बता रहे हैं। निश्चित तौर पर यह भाजपा को सांत्वना देने और वोटरों को भ्रम में डालने के भी हो सकते हैं, ताकि लोगों को यही लगे कि कांग्रेस अकेले सरकार नहीं बना पाएगी।