Saturday, March 21, 2026
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एक गांव के रकबे को दो मिलों ने किया सर्वे

  • गन्ना विभाग का खेल, शिकायत के बाद हुआ खुलासा
  • गन्ना माफियाओं को लाभ देने के लिए किया सर्वे में खेल

जनवाणी संवाददाता |

मवाना: गन्ना विभाग और मिल के अधिकारी गन्ना माफियाओं को लाभ देने के लिए कुछ भी करने को तैयार है। गन्ना विभाग के ने पूर्व में एक हेक्टेयर रकबे की जगह 13 गुणा रकबा दर्ज कर दिया। एक बार फिर विभागिय अधिकारियों पर गन्ना माफिया को सीधा लाभ पहुंचाने का प्रयास किया।

आईटीआई कार्यकर्ता का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने वाहवाही लूटने के लिए हस्तिनापुर खादर क्षेत्र में बार्डर की शुगर मिलों के ज्वाइंट सर्वे में एक ही रकबा दोनों मिलों में दर्ज कराकर गन्ने का रकबा बढ़ा होने का दावा पेश कर रिपोर्ट भी शासन को भेज दी। गड़बड़झाले की शिकायत आरटीआई कार्यकर्ता ने मुख्यमंत्री से की तो विभागिय अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

मामला गंगा की तलहटी में मवाना और टिकौला शुगर मिल के बार्डर पर बसे गांव दूधली खादर गांव का है। जो महज बानिगी भर है। किसान सुरेश कुमार ने बताया कि यह गांव टिकौला और मवाना शुगर मिल का बार्डर का गांव है। इस गांव में टिकौला मिल द्वारा पौधा गन्ना 126 हेक्टेयर गन्ना रकबा सर्वे में दर्ज किया गया। जबकि मवाना चीनी मिल ने इसी गांव का 101 हेक्टेयर गन्ना दर्ज किया।

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इसके अलावा पेड़ी अलग से दर्ज की गई। दोनों मिलों में दर्ज रकबा एक-दूसरे के क्षेत्र में शामिल है। क्योंकि दोनों मिलों का पेड़ी-पौधे का रकबा मिलाकर भी गांव के कुल भूअभिलेख रकबे से कहीं अधिक है। इसके अलावा गांव की अधिकांश भूमि पर खीरा, परमल और बड़े क्षेत्रफल में धान की फसल है।

माफियाओं को लाभ देने के लिए बढ़ाया जाता है रकबा

उदाहरण के तौर पर पवन कुमार के नाम पर 10 हेक्टेयर से अधिक गन्ने का रकबा विभागीय वेबसाइट पर दर्ज है। जबकि उसकी भूमि विभागीय वेबसाइट के अनुसार एक हेक्टेयर दर्ज है। यह गन्ना रकबा सिर्फ गन्ना माफिया को लाभ देने के लिए बढ़ाया गया है। वहीं, आरोप है कि गन्ना रकबा बढ़वाकर डीसीओ मेरठ शासन को रिपोर्ट भेजकर वाहवाही लूटने का काम कर रहे हैं। क्योंकि सर्वे से पहले डीसीओ ने चीनी मिल प्रबंधकों और समिति अधिकारियों की बैठक कर हर हाल में गन्ना रकबा बढ़ाने के निर्देश दिए थे। निर्देशों का पालन भी हुआ और फर्जी तरीके से डबल सर्वे कराकर रकबा बढ़ा दिया गया।

भूमिहीन और मृतकों के नाम पर बने हैं बांड

किसान सुरेश कुमार ने बताया कि भूमिहीन, मृतकों और नो-केन माफिया के नाम बड़ी संख्या में गन्ने का फर्जी रकबा दर्ज कर बांड बना दिए गए हैं। इस बाबत डीसीओ मेरठ दुष्यंत कुमार ने गन्ना माफिया से मिलीभगत के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह से सर्वे हुआ है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

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