Saturday, March 7, 2026
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दो माह से लापता युवती की खोज में सरकारी दफ्तरों का पहरेदार बना पीड़ित पिता

  • पुलिस प्रशासन व जिला प्रशासन से केवल मिल रहा आश्वासन
  • नामदर्ज रिपोर्ट दर्ज होने पर भी दो माह से नही हो रही कोई किसी प्रकार की कार्यवाही

जनवाणी संवाददाता |

मुजफ्फरनगर: जनपद के थाना चरथावल क्षेत्र के गांव दधेडू निवसी मौ. अययूब पिछले दो माह से थाना चरथावल व वरिष्ट पुलिस अधीक्षक के दफ्तरों के चक्कर काट कर पीडित पिता थक चुका हैं, मगर अभी तक कोई किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं हो पाई हैं। पीडित ने बताया कि थाना प्रभारी द्वारा कार्यवाही के नाम पर जांच चली होने का हवाला देकर पल्ला छाड देता हैं। पीडित का आरोप हैं कि रिपोर्ट नाम दर्ज होने के बावजूूद भी पुलिस प्रशासन कोई कार्यवाही या कोई गिरफ्तारी पिछले दो माह में नही की पाई हैं।

बुधवार को थाना चरथावल क्षेत्र के गांव दधेडू निवासी पीडित परिवार ने मीडिया सेंटर के पत्रकारो से वार्ता कर बताया कि किस तरह से पुलिस प्रशासन द्वारा दबंगों के साथ मिलकर कार्यवाही न कर जिल्लद झेलने एवं परिवार को आत्मदाह करने के लिए मजबूर किया जा रहा हैं। आरोप हैं कि दो माह पूर्व 15 जनवरी को माता पिता की गैर मौजूदगी में घर से ही नाबालिग लडकी को बहला फुसला कर ले गये थे।

आरोप हैं कि खेत से आने के बाद पीडित पिता को लडकी को दबंगों द्वारा ले जाने की खबर इधर उधर से प्राप्त हुई। आरोप हैं कि तभी पीडित पिता ने तीनों आरोपियों शमशाद पुत्र इलियास, शाहनवाज पुत्र शमशाद एवं मुजम्मिल पुत्र अब्दुल हक उर्फ तोती के विरूध थाना चरथावल में रिपोर्ट दर्ज कराकर लडकी की बरामदगी की गुहार लगाई। आरोप हैं कि थाना प्रभारी द्वारा रिपोर्ट अपनी तरफ से ही बनाकर कार्यवाही करने का आश्वासन दिया था। आरोप हैं कि रिपोर्ट में प्रकरण से जुडी एक भी बात नही लिखी।

पीडित ने बताया कि चरथावल थाना प्रभारी ने मेरी रिपोर्ट दर्ज नही की अपनी तरफ से हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए मामला वेटिंग सूची में डाल दिया गया। पीडित पिता ने सोशल मीडिया के माध्यम से जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन को लापता लडकी को बरामद न करने पर परिवार सहित आतमदाह की चेतावनी दी हैं। पीडित ने कहा कि भाजपा राज में एक और जहां खाकीधारी हर पीडित को इंसाफ की दहलीज तक ले जाने का दावा करते हैं, तो वहीं अपनी तिजोरियों को भरने का भी दरवाजा वहीं से तलाशते हैं। आरोप हैं कि चंद रूपये लेकर अपने घर का दिया तो जला लिया गया, मगर गरीब के बच्चों की जाने की कीमत चंद रूपयों से तौल दी।

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