जनवाणी ब्यूरो |
बलरामपुर: 2 नवम्बर 1990 को निहत्थे कारसेवकों पर तत्कालीन शाषन के मंशानुरूप गोलियां चलायी गयी थी। उत्तर प्रदेश में तब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे. हिंदू साधु-संतों अयोध्या कूच कर रहे थे. उन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अयोध्या पहुंचने लगी थी. प्रशासन ने अयोध्या में कर्फ्यू लगा रखा था, इसके चलते श्रद्धालुओं के प्रवेश नहीं दिया जा रहा था. पुलिस ने कथित बाबरी मस्जिद के 1.5 किलोमीटर के दायरे में बैरिकेडिंग कर रखी थी।
विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष सुवीर श्रीवास्तव ने कहा कि रक्तदान जीवनदान है। हमारे द्वारा किया गया रक्तदान कई जिंदगियों को बचाता है। इस बात का अहसास हमें तब होता है जब हमारा कोई अपना खून के लिए जिंदगी और मौत के बीच जूझता है। उस वक्त हम नींद से जागते हैं और उसे बचाने के लिए खून के इंतजाम की जद्दोजहद करते हैं।
विश्व हिंदू परिषद के जिला महामंत्री रूपेश मिश्रा ने कहा कि कारसेवकों की भीड़ बेकाबू हो गई थी. इस घटना के बाद अयोध्या से लेकर देश का माहौल पूरी तरह से गर्म हो गया था. इस गोलीकांड के दो दिनों बाद ही 2 नवंबर को हजारों कारसेवक हनुमान गढ़ी के करीब पहुंच गए, जो बाबरी मस्जिद के बिल्कुल करीब था।
आज बलरामपुर में विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारी और पचपेड़वा के अध्यक्ष लवकुश मिश्र, मंत्री बंटी, नगर मंत्री विशाल श्रीवास्तव, उतरौला नगर अध्यक्ष सूरज यादव आदि अनेक कार्यकर्ताओं ने रक्तदान किया।
इस अवसर पर सीएमएस डॉ. प्रवीण कुमार ने सभी को प्रमाण पत्र दिया। कार्याध्यक्ष अजय श्रीवास्तव बजरंग दल संयोजक चन्दन मिश्र व बलोपसना प्रमुख दीपक चौधरी उपस्थित रहे।

