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मतदान खत्म, क्या अब होगी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई?

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मतदान खत्म, क्या अब होगी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई?
  • क्या चलता रहेगा नोटिसों का खेल? बिना नक्शा पास किये ही बना अस्पताल

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मतदान प्रक्रिया 10 फरवरी को खत्म हो गई है। अब देखना ये है कि आवास विकास अवैध निर्माणों के खिलाफ नोटिसों का खेल खेलता है या उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। क्षेत्र में कई ऐसे अवैध निर्माण हैं। जहां आवासीय में कमर्शियल यूज हो रहा है और कई जगह ऐसी हैं जहां नक्शा किसी और निर्माण का पास है और यूज किसी ओर के लिये हो रहा है।

हापुड़ रोड स्थित एक अस्पताल में यही खेल हुआ। यहां विवाह मंडप का नक्शा पास है और अस्पताल अवैध रूप से चल रहा है। आवास विकास के खेल भी निराले हैं। यहां अवैध निर्माणों को नोटिस तो भेज दिये जाते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। विभाग के अधिकारी नोटिसों का खेल खेलते रहते हैं। क्षेत्र के सेक्टर एक, एच ब्लॉक, डी ब्लॉक में कई ऐसे निर्माण हैं। जहां निर्माण कर्ताओं ने अपनी मनमानी करते हुए निर्माण कर लिया और विभाग कुछ नहीं कर रहा है।

एच ब्लॉक स्थित डिलीसियस बेकर्स की बात करें तो विभाग की ओर से इन्हें कई नोटिस भेजे गये। आवासीय में कमर्शियल निर्माण कर रखा है और सरकारी जमीन तक कब्जाई है। हद तो तब हो गई जब यहां एक ओर डिलीसियस स्वीट्स के नाम से अवैध निर्माण बनकर तैयार हो गया और अधिकारी देखते रहे। अब विभाग ने यहां नोटिस तो भेज दिया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

बिना नक्शे के चल रहा अस्पताल

क्षेत्र के हापुड़ रोड स्थित सेक्टर-13 में 8/13 भी ऐसा ही मामला है। जहां विवाह मंडप संचालित था, लेकिन यहां मंडप के स्थान पर अस्पताल चल रहा है और नक्शा अब भी मंडप का ही पास है। इस मामले में विभाग की ओर से कई नोटिस भेजे गये और सीएमओ को पत्र लिखकर अस्पताल की मान्यता भी रद कराये जाने की बात कही गई, लेकिन यहां अभी तक भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अधिकारी लगातार यहां बहाना बनाते रहे हैं कि मतदान के बाद कार्रवाई होगी, लेकिन अब मतदान को हुए भी तीन दिन बीत चुके हैं। अब देखना यह है कि अधिकारियों की ओर से यहां कब कार्रवाई की जाती है।

लखनऊ से हुए आदेश, नहीं हुई कार्रवाई

अवैध निर्माण करने वालों और आवासीय का कमर्शियल यूज करने वालों के खिलाफ अपर आवास आयुक्त ने भी यहां मेरठ आवास विकास परिषद को पत्र लिखा था। यह पत्र जनवरी माह में विभाग में पहुंचा था और दो सप्ताह के भीतर उनके खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिये गये थे, लेकिन चुनाव के चलते कार्रवाई नहीं हुई। अब इस पत्र को आये भी एक माह से ऊपर का समय हो चुका है। अब देखना यह है कि इन आदेशों पर विभाग क्या कार्रवाई करता है।