Monday, April 6, 2026
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खरतपतवार

AmritVani 2


सर्दियों का पूरा मौसम मुल्ला नसरुद्दीन ने अपने बगीचे की देखरेख में बिताया। वसंत आते ही हर तरफ मनमोहक फूलों ने अपनी छटा बिखेरी। उन्हें देखकर नसरुद्दीन की रुह तरोताजा हो गई। लेकिन उन्हें यह देखकर दुख हुआ कि बेहतरीन गुलाबों और दूसरे शानदार फूलों के बीच कुछ जंगली फूल भी झांकते दिख गए, जो शानदार फूलों के बीच अच्छे नहीं लग रहे थे।

नसरुद्दीन ने सोचा कि अनचाहे फूलों का उखाड़कर फेंक दिया जाए। उन्होंने ऐसा ही किया और उन फूलों को उखाड़कर फेंक दिया। लेकिन कुछ दिनों के भीतर वे जंगली फूल और खरपतवार फिर से उग आए। अब नसरुद्दीन ने सोचा क्यों न उन्हें खरपतवार दूर करने वाली दवा का छिडकाव करके नष्ट कर दिया जाए। लेकिन किसी जानकार ने नसरुद्दीन को बताया कि ऐसी दवाएं अच्छे फूलों को भी कुछ हद तक नुकसान पहुंचाएंगी।

निराश होकर नसरुद्दीन ने किसी अनुभवी माली की सलाह लेने का तय किया। नसरुद्दीन ने एक अनुभवी माली के सामने अपनी समस्या रखी, तो माली ने कहा, ‘ये जंगली फूल, ये खरपतवार, तो शादीशुदा होने की तरह है, जहां बहुत सी बातें अच्छीं होतीं हैं, तो कुछ अनचाही दिक्कतें और तकलीफें भी पैदा हो जातीं हैं।’ नसरुद्दीन ने पूछा, ‘अब मुझे क्या करना चाहिए?’ माली ने जवाब दिया, ‘तुम अगर उन्हें प्यार नहीं कर सकते हो तो बस नजरंदाज करना सीखो। इन चीजों की तुमने कोई ख्वाहिश तो नहीं की थी, लेकिन अब वे तुम्हारे बगीचे का हिस्सा बन गई हैं।’ जिंदगी में भी कई बार अनचाही चीजों के साथ जीना पड़ता है।

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