- चौधरी चरण सिंह ने पहली बार संभाली थी यूपी के सीएम के रूप में बागडोर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पश्चिम ने उत्तर प्रदेश को चार मुख्यमंत्री दिये। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह 1937 में पहली बार छपरौली विधानसभा से चुनाव लड़े थे। उस दौरान छपरौली मेरठ जनपद का ही हिस्सा हुआ करता था। इसके बाद 3 अप्रैल 1967 को पहली बार चौधरी चरण सिंह ने यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में बागडोर संभाली थी। तब करीब एक साल उनकी सरकार चली। उसके बाद उन्होंने 17 अप्रैल 1968 को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था तथा मध्यावधि चुनाव हुए।

फिर से 17 फरवरी 1970 को दूसरी बार सीएम बने थे। तब कांग्रेस के समर्थन से दूसरी बार सीएम बने। 1937 में पहली बार छपरौली से चुनाव लड़ा। दूसरा चुनाव 1946, फिर तीसरा 1952 और 1962 और 1967 में विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया। चौधरी चरण सिंह ने अपने कार्यकाल में 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून पारित कराया, जो बड़ा निर्णय था।

यही नहीं, बाबू बनारसी दास 1979 में बाबू बनारसी दास यूपी के मुख्यमंत्री बने थे। तब वह जनता पार्टी का हिस्सा हुआ करते थे। बाबू बनारसी दास मूलरूप से बुलंदशहर के अतरौली गांव के रहने वाले थे। वह बेहद सरल स्वभाव के बाबू बनारसी दास पहले ऐसे सीएम रहे हैं, जिन्होंने सरकारी बंगला लेने से इनकार कर दिया था और लखनऊ स्थित कैंट में अपने आवास से ही सीएम का कार्य देखा था। बाबू बनारसी दास और चौधरी चरण सिंह बड़ी शख्सियत पश्चिमी यूपी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में दी।

यही नहीं, 1995 में मायावती ने पहली बार मुख्यमंत्री की बागडोर संभाली मायावती मूलरूप से गौतमबुद्धनगर जनपद के बादलपुर की रहने वाली है और वह चार बार यूपी की सीएम बनी और वर्तमान में भी उनकी पार्टी वर्तमान में भी चुनाव मैदान में हैं। चौधरी चरण सिंह की विरासत के लिए जयंत चौधरी की रालोद पार्टी चुनाव मैदान में हैं। हालांकि बाबू बनारसी दास के पुत्र हरेन्द्र अग्रवाल ही राजनीति में हैं। 2019 का लोकसभा चुनाव उन्होंने लड़ा था, जो हार गए थे। विधानसभा चुनाव में उनके परिवार से कोई भी चुनाव मैदान में नहीं हैं।

कल्याण सिंह प्रथम बार राम लहर में यूपी के सीएम बने थे। वह भी मूलरूप से अतरौली (अलीगढ़) के रहने वाले थे। इस तरह से यूपी को पश्चिमी यूपी ने चार-चार मुख्यमंत्री दिये हैं। ये चारों वेस्ट यूपी से ही चुनाव लड़ चुके हैं। चुनाव लड़ने और मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने का इनका सियासी इतिहास बहुत रोचक रहा है। हालांकि यूपी को चार सीएम देने वाला वेस्ट यूपी हाशिये पर हैं। पिछले एक दशक से देखा जाए तो बड़ा कैबिनेट मंत्रालय भी वेस्ट यूपी को नहीं मिला। 2017 के चुनाव में वेस्ट की जनता ने 136 में से रिकॉर्ड 109 सीटें भाजपा की झोली में डाली थी, लेकिन फिर भी सत्ता की झोली खाली रही। मंत्रालय तो दिये, लेकिन कोई खास तव्वजो नहीं दी गई। कभी वेस्ट यूपी सीएम देता था, अब मंत्रालय भी ढंग का नहीं और नहीं डिप्टी सीएम ही मिल पाया, जबकि पूर्वी यूपी को सीएम तो दिया ही, साथ ही दो डिप्टी सीएम भी दिये।

