
प्राय: स्वास्थ्य संबंधी साहित्य में हमें असंतृप्त वसा खाने को कहा जाता है और संतृप्त वसा से बचने को कहा जाता है। क्या हम जानते हैं कि किस खाद्य पदार्थ में सतृंप्त वसा है और किस खाद्य पदार्थ में असंतृप्त वसा।
वसा का हम कई रूपों में प्रयोग करते हैं। खाना बनाने के तेल, मक्खन, घी, चीज आदि वसा के विभिन्न रूप हैं। इसके अतिरिक्त मांस, दूध, खोया, और तले हुए खाद्य पदार्थों में हमें बहुत वसा मिलती है। परांठे, पूड़ियां, समोसे, कचौड़ी, पकौड़े भी वसा के लोकप्रिय स्रोत हैं। अब बर्गर, पिजा और चाउमिन इनसे भी बड़े स्रोत बन गए हैं। आइए देखें कि कौन सी वसा खाएं और कितनी खाएं?
मांस, शुद्ध घी, वनस्पति घी, मक्खन, क्रीमयुक्त दूध व सोया और तले हुए खाद्य पदार्थ संतृप्त वसा के बड़े स्रोत हैं। यह सतृंप्त वसा हमारी रक्तवाहिनी नलिकाओं के लिए घातक हो सकती है।
अंडे का पीला भाग और वनस्पति घी स्वास्थ्य के दुश्मन माने जाते हैं और इन्हें सीमित मात्र में ही लिया जाना चाहिए।
जैतून के तेल, मूंगफली के तेल, तिल के तेल और सरसों के तेल में अर्द्धसंतृप्त वसा होती है। इन्हें सीमित मात्रा में ही खाया जा सकता है।
बादाम, अखरोट, काजू और मूंगफली में भी अर्द्धसंतृप्त वसा होती है और इन्हें सीमित मात्रा में खाया जा सकता है।
डिब्बाबंद मांस में अधिक संतृप्त वसा होती है अत: उसके स्थान पर ताजा मांस लेना बेहतर है।
परांठे या पूरी के स्थान पर रेशायुक्त चपाती खाना बेहतर है।
बिस्कुट आदि खाने के स्थान पर ब्राउन ब्रेड खाना बेहतर है।
बाजारू तले हुए नमकीन पदार्थों के स्थान पर भुने हुए नमकीन ही खायें। भुने छिले चने, भुनी मूंगफली, छिले चने, टमाटर, प्याज व हरी चटनी मिलाकर स्वादिष्ट चाट बनाई जा सकती है। इसे शाम को स्नैक के रूप में ले सकते हैं।
मिठाइयों के स्थान पर ताजे फल खाना बेहतर है।
पकौड़ों के स्थान पर वसारहित पोहे और उपमा खाया जा सकता है।
पुलाव और फ्राइड राइस के स्थान पर उबले हुए चावल या सब्जियों से भरपूर बिना तेल का पुलाव बनाया जा सकता है।
सोया दूध और सोया दही का प्रयोग लाभदायक है।
यदि आप इन दिशा निर्देशों का कुछ हद तक पालन कर सकें तो काफी संभावना है कि आप के शरीर में हानिकारक कोलेस्ट्रोल की मात्र सीमित रहेगी और आप कई बीमारियों से बचे रहेंगे।
अशोक गुप्त


