
अमेरिका के छब्बीसवें राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट, जो 1906 का शांति का नोबेल जीतकर यह पुरस्कार पाने वाले पहले अमेरिकी भी बने थे, ने 1903 में मजदूर दिवस के अपने बहुचर्चित सम्बोधन में मजदूरों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बात कही थी: मनुष्य के जीवन में अगर कोई सबसे बड़ा पुरस्कार है, तो वह है ऐसा काम करने का मौका, जिससे उसकी जीविका भी चले और महत्ता भी बढ़े। अफसोस कि उनके उक्त संबोधन के 120 साल बीत जाने के बाद की दुनिया में भी बड़ी संख्या में मजदूर इस ‘अपने जीवन के सबसे बड़े पुरस्कार’ से वंचित हैं।