Friday, February 6, 2026
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शीतकालीन सत्र: पान मसाला व तंबाकू पर नई टैक्स व्यवस्था, 28 से बढ़कर 40 फीसदी होगा GST

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सिगरेट, गुटखा, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पादों पर कराधान को नए ढंग से विनियमित करने के लिए दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही हैं। नया ढांचा सिगरेट, चबाने वाला तंबाकू, सिगार, हुक्का, जर्दा और सुगंधित तंबाकू सहित सभी तंबाकू उत्पादों पर कराधान का नया आधार तैयार करेगा। इस संशोधन से सरकार का लक्ष्य तंबाकू उत्पादों को महंगा कर उनकी खपत में कमी लाना और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को नियंत्रित करना है। दूसरा विधेयक मुख्य रूप से पान मसाला और ऐसे विशिष्ट उपभोक्ता उत्पादों पर अतिरिक्त उपकर लगाने का प्रावधान करता है।

स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा सेस विधेयक, 2025 के तहत अब उपकर की गणना मशीन की क्षमता, मशीन के चलने की अवधि और उत्पादन से जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं के आधार पर की जाएगी, जिससे उत्पादन पर अधिक सटीक निगरानी और कर अनुपालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। इस विधेयक के साथ तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी ढांचे में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है, जिसके तहत मौजूदा 28 फीसदी जीएसटी प्लस कंपनसेशन सेस की व्यवस्था को संशोधित कर जीएसटी दर को बढ़ाकर 40 फीसदी किया जाएगा, जबकि कंपनसेशन सेस अलग-अलग उत्पादों पर तय दरों के अनुसार जारी रहेगा, जो अभी 5 फीसदी से 290 फीसदी तक लगता है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं पर कुल कर बोझ नहीं बढ़ेगा।

उदाहरण के लिए, किसी खास तरह की सिगरेट पर इस समय 28 फीसदी जीएसटी के साथ 290 फीसदी कंपनसेशन सेस लगाया जाता है, जिससे कुल कर भार 318 फीसदी हो जाता है। नए प्रस्तावित ढांचे में जीएसटी दर बढ़कर 40 फीसदी हो जाएगी, जबकि कंपनसेशन सेस घटकर 278 फीसदी किया जाएगा। इस समायोजन के बावजूद उपभोक्ता पर कुल कर भार 318 फीसदी ही रहेगा। यानी कर संरचना में तकनीकी बदलाव होगा, लेकिन अंतिम कीमत पर इसका अतिरिक्त असर नहीं पड़ेगा। दोनों विधेयकों के संसद से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद सरकार नए नियमों को अधिसूचित करेगी।

संसद न चलने देने की चेतावनी

समाजवादी पाटी के सांसद रामगोपाल यादव और पश्चिम बंगाल से माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने एसआईआर पर चर्चा न कराए जाने पर संसद न चलने देने की चेतावनी दी। संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू होगा। रामगोपाल ने कहा कि यदि सरकार एसआईआर पर चर्चा के लिए तैयार नहीं होगी, तो हम संसद नहीं चलने देंगे। वहीं, जॉन ब्रिटास ने कहा कि चुनाव सुधार के नाम पर ही सही, सरकार को एसआईआर पर चर्चा की मांग स्वीकार करनी चाहिए।

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