एक प्रसिद्ध ऋषि रहते थे, जिन्हें लोगों का भाग्य बताने के लिए जाना जाता था। एक दिन राजा ने उस ऋषि के बारे में सुना। राजा उसका अभिवादन करना चाहता था। राजा ने अपने सैनिकों को ऋषि के पास भेजा सिपाही ऋषि को राजा के महल में चलने का आग्रह किया।
ऋषि के महल पहुंचने पर राजा ने अपने भविष्य के बारे में कुछ बताने के लिए कहा। राजा की कुंडली देख कर ऋषि ने उन्हें बताना शुरू किया। राजा सभी अच्छी बातों को सुनकर बहुत खुश हुए। ऋषि को उसके द्वारा की गई भविष्यवाणी से खुश हो कर राजा ने सोने और चांदी से पुरस्कृत किया।
अब, राजा ने ऋषि से अपन्ने दुर्भाग्य के बारे में बताने के लिए कहा। ऋषि उनके दुर्भाग्य के बारे में बताना शुरू किया। अब हर बार राजा को दुर्भाग्य की बात सुननी पड़ी। राजा बहुत क्रोधित हो गया।
एक समय तो उन्हें इतना गुस्सा आया कि उन्होंने ऋषि पर चिल्लाते हुए कहा, रुको, इतनी बेहूदा बात करने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? राजा ने अपनी तलवार निकाली और उसे ऋषि की ओर इशारा करते हुए कहा, मैं तुम्हें अपनी मृत्यु का समय बताने का आदेश देता हूं।
ऋषि ने देखा कि राजा बहुत क्रोधित है। फिर ऋषि और कुछ गणना करने के बाद शांति से उत्तर दिया, मेरी गणना के अनुसार, आपकी मृत्यु, मेरी मृत्यु से ठीक एक घंटा बाद होगी। राजा यह सुनकर दंग रह गया और उसने तुरंत अपनी तलवार म्यान में रख ली।
उसे लगा कि ऋषि के मरने से उसकी मृत्यु भी निश्चित है साथ ही उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। राजा ने ऋषि से क्षमा याचना कर उसे और अधिक धन देकर घर भेज दिया। ऋषि की बुद्धिमता ने उसकी रक्षा की। कठिन घड़ी में विवेक का साथ नहीं त्यागना चाहिए।