
एंडटीवी के कलाकार होली से जुड़ी अलग-अलग रीतियों और परंपराओं के बारे में बता रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस त्यौहार के कई रंग-बिरंगे पहलुओं के बारे में भी बताया!
रंगों का महत्व समझाती होली
रंग आपकी भावनाओं, आपके उत्साह और दिल की उमंग को दर्शाते है। हर रंग की अपनी एक छटा और रंगत होती है। यही बात होली को बाकी त्यौहारों से खास बनाती है। इस पर थोड़ी और रोशनी डाल रही हैं, ‘संतोषी मां सुनाएं व्रत कथाएं’ में संतोषी मां बनीं ग्रेसी सिंह, ‘‘होली मेरे पसंदीदा त्यौहारों में से एक है और इसकी कई वजहें हैं। अपनों को गुलाल के रंग में रंग देने के उत्साह के अलावा भी यह त्यौहार जीवन के रंगों के महत्व के बारे में भी समझाता है। बचपन से ही मुझे यह जानना अच्छा लगता है कि ये सारे त्यौहार किस तरह आध्यात्मिक रूप से हमसे जुड़े हुए हैं। आज भी वो परंपराएं मुझे हैरान करती हैं।’’
अपनों की याद दिलाती होली
हर किसी के एक या दो फेवरेट रंग होते हैं! वो रंग उनका लकी रंग हो सकता है या फिर वो रंग उनके मूड को बेहतर बनाने का काम करता हो। उनकी आत्मा तृप्त हो जाती हो या फिर भावनाओं को छू जाते जाते हों। एण्डटीवी के ‘हप्पू की उलटन पलटन’ में दरोगा हप्पू सिंह बने योगेश त्रिपाठी कहते हैं, ‘‘होली मुझे अपने बचपन की याद दिलाती है जब पूरा परिवार इकट्ठा होता था और त्यौहार की तैयारी करता था। देसी घी और मावे से मिठाइयां बनायी जाती थीं, गुलाल से सजी थाली होती थी और इन सारी चीजों में हिस्सा लेने में हम सबको बड़ा मजा आता था। हर त्यौहार पर मुझे अपनी मां की कमी खलती है, लेकिन होली में मुझे उनकी सबसे ज्यादा याद आती है! उनकी वजह से ही पीला रंग मेरा पसंदीदा रंग बन गया। जब मेरी मां कैंसर से जूझ रही थीं, उन्होंने मेरे लिये एक पीला स्वेटर बुना था और तब से वह मेरे लिये सबसे कीमती तोहफा बन गया है। और पीला रंग मेरे दिल में बस गया।’’
किसके बिना अधूरी है यह होली
हर त्यौहार के साथ कोई ना कोई ऐसी चीज जरूर जुड़ी होती है, जिसके बिना त्यौहार अधूरा रह जाता है। होली को क्या चीज पूर्ण बनाती है इस बारे में एण्डटीवी के ‘मौका-ए-वारदात’ से जुड़े मनोज तिवारी कहते हैं, ‘‘उत्तर भारत में मीठे, नमकीन पकवान और ठंडाई होली के लिये सबसे जरूरी चीजें होती हैं। इस त्यौहार का मतलब ही है लोगों से मिलना-जुलना, उन्हें बधाइयां देना और एक साथ मिलकर लोकगीत गाना। और हां सबसे जरूरी बात- गुझिया के बिना तो जैसे होली अधूरी ही मानो।
महाराष्ट्र में जो गुझिया बनती है उसका स्वाद उत्तर भारत में बनने वाली गुझिया से काफी अलग होता है। इसके बारे में बात करके मुंह में पानी आ रहा है। मैं सभी लोगों को सुरक्षित और खुशहाल होली की शुभकामनाएं देता हूं।’’
बचपन की यादों को ताजा करती है होली
त्यौहारों के साथ ढेर सारी यादें भी चली आती हैं। भारत में हम सब अलग-अलग त्यौहारों को मनाते हुए बड़े हुए हैं। उन त्यौहारों को मनाने का तरीका भी अलग-अलग होता है। इस बारे में एण्डटीवी के ‘मौका-ए-वारदात’ के रवि किशन कहते हैं, ‘‘अब होली एक सेलिब्रेशन बनकर रह गयी है। ड्रेस कोड के साथ बड़ी-बड़ी पार्टियां होती हैं और सितारों के बच्चे उनमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए नजर आते हैं। जब हम छोटे थे तो हमारी होली आज के दौर से थोड़ी अलग हुआ करती थी। हर तरह के रंगों से एक-दूसरे का चेहरा रंग देने की होड़ से लेकर इस दिन बनने वाले तरह-तरह के पकवानों का स्वाद लेने तक, हमारे त्यौहार का उत्साह कुछ अलग ही हुआ करता था। उस समय के बच्चों में एक अलग तरह की मासूमियत थी।’’


