Friday, March 6, 2026
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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: क्रांतिधरा की महिलाएं फैला रहीं शिक्षा का उजियारा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जिस क्रांतिधरा ने दशानन रावण की पत्नी मंदोदरी, विश्व विजेता पहलवान अलका तोमर, जूड़ो चैपिंयन गरिमा चौधरी और एवरेस्ट विजेता तूलिका रानी जैसी योग्य और गुणवान लोगों को जन्म दिया है। उसी धरा पर वर्तमान समय में भी महिलाएं अपने परिश्रम, लगन और दूरगामी सोच के चलते अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता के झंडे गाड़ रही है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ऐसी महिलाओं को याद कर उनके कार्य की सराहना दैनिक जनवाणी हमेशा करता आया है।

दो बहनें संवार रही गरीब बच्चों का भविष्य
15 8 e1615173471965सीसीएसयू विवि में रहने वाली डा. रुचि श्रोत्रिय और शुचि श्रोत्रिय दोनों संगी बहनें हैं और दोनों ही प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन जहां वह स्कूल के बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रही है, वहीं वह विवि के निकट रहने वाले बच्चों का भी भविष्य संवार रही है। प्राथमिक विद्यालय गोकलपुर में कार्यरत शुचि ने बताया कि वह गांव में जाकर ऐसी बेटियों को भी रोजगार परक बनाने का काम कर रही हैं, जो घर से बाहर शिक्षित होने के लिए नहीं निकल पाती है। शुचि उन छात्राओं को आर्ट एंड क्राफ्ट आदि की बारे में शिक्षित कर रही है ताकि वह अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। डा. रुचि ऐसी छात्राओं की मदद कर रही हैं, जिनके पास किताबों और पढ़ने के लिए पैसे नहीं होते है। दोनों ही बहनें अपने आपमें एक मिसाल कायम कर रही है।

गरीब बच्चों को शिक्षित कर गढ़ रही उनका भविष्य
16 9 e1615173935302गरीब के अंधेरे में उजाले की आस थी, मंजिल दूर भले थी, लेकिन कुछ पाने की आस थी। श्रुति रस्तोगी शिक्षिका की नौकरी छोड़कर मलिन बस्ती के बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रही है। मलीन बस्ती के छोटे-छोटे बच्चे भीख मांगने का काम छोड़ जहां उनसे ‘क’, ‘ख’, ‘ग’ और गिनती सिखने के साथ अपने भविष्य को सुधारने का काम कर रही है। वहीं, कुछ बच्चों ने श्रुति के सपंर्क में आकर नशा आदि करने भी छोड़ दिया है। श्रुति ने पांच छात्रों के साथ कक्षा शुरु की थी, लेकिन अब मलीन बस्ती के 60 से अधिक छात्र उनसे शिक्षा ले रहे है। श्रुति ने बताया कि वह सुबह के समय घूमने जाती थी तो उन्होंने देखा कि दिन निकलने के साथ ही यह बच्चे गुब्बारे आदि बेकने का काम शुरु कर देते थे। श्रुति ने जब उन बच्चों से बात की तो उन्होंने अपनी पीड़ा बताई। बच्चों से बात करने के बाद उन्होंने उनके माता-पिता से शिक्षित करने के लिए बात की और वह मान गए तभी से वह इन बच्चों को शिक्षित कर रही है। इसके साथ श्रुति मलिन बस्ती में रहने वाली महिलाओं की समस्याओं का समाधान भी करती है।

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