- सिद्धचक्र महामंडल विधान का छटा दिन
जनवाणी संवाददाता |
बिनौली: श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र बरनावा की तपोभूमि में अष्टह्निका महापर्व के उपलक्ष्य में चल रहे नो दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान के छठे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर भगवान को 256 श्रीफल समर्पित
ब्रह्मचारी पंडित प्रदीप पीयूष शास्त्री ने कहा कि सिद्धचक्र महामंडल विधान कर्म मूलतः आठ होते है। जिनके कारण यह संसारी जीव सतकर्म और असत्य कर्म करता है।
सत्य कर्म करने से अच्छी भोगोप की सामग्री प्राप्त होती है। दुष्कर्म करने से शरीर रोगग्रस्त, संतान आचरण हीन, पत्नी झगड़ालू,इत्यादि। अशुभ चीजों की प्राप्ति होती है। श्री चंद्रप्रभु भगवान के दरबार मे जो श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान को श्रद्धा भक्ति के साथ आराधना सम्पन्न करता है।
वह सदैव सुख-संपत्ति वैभव साम्राज्य लक्ष्मी पति कुबेर सभी सम्पदायें उसको सहज ही प्राप्त हो जाती है। विधान में बादामी, जैन, कृष्णा जैन, सरिता जैन, पूनम जैन, नरेश जैन, संदीप जैन आदि उपस्थित रहे।

