
‘इंडियन एक्सप्रेस’ (23 मई 2023) में मुखपृष्ठ पर प्रथम स्टोरी के रूप में प्रकाशित अपने आलेख ‘बहुत-सी लड़कियों की तरह सालों-साल मुझे भी चुप-चाप इस शख्स (बृजभूषण शरण सिंह) के हाथों (यौन-उत्पीड़न) सहना पड़ा’ में विनेश फोगाट ने एक गौरतलब बात कही है: ‘अब कोई डर नहीं बचा था। केवल इतना ही डर बाकी था कि हमें कुश्ती न छोड़नी पड़े। हमारा भरोसा है कि इस खेल के हमारे पास अभी पांच साल हैं। लेकिन ये सब प्रतिरोध करने के बाद कौन जाने भविष्य के गर्भ में हमारे लिए क्या है। हम यह भी जानते हैं कि हमारे जीवन को खतरा हो सकता है। क्योंकि हमने बृजभूषण शरण सिंह से ही नहीं, सत्ता की दूसरी ताकतों से भी झगड़ा मोल ले लिया है। लेकिन मैं मौत से नहीं डरती।’ न्याय के लिए संघर्ष के रास्ते पर महिला पहलवान अंतत: डर और लालच की मनोवृत्तियों से मुक्ति पा लेती हैं।