Wednesday, March 4, 2026
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नवरात्र में इस वर्ष आधे से भी कम बनाई गईं मूर्तियां

  • हर साल के मुकाबले 60 प्रतिशत तक कम हुआ कारोबार, मूर्तियां बनाने वाले बंगाली कारीगरों की खली कमी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शारदीय नवरात्र 17 अक्टूूबर से शुरू होने जा रहे हैं। ऐसे में माता रानी की मनमोहक मूर्तियों की हर साल जमकर डिमांड होती है, लेकिन इस बार मूर्तियों का कारोबार हर साल की मुकाबले आधे से कम रह गया है। वहीं, इस बार कई मूर्तिकारों ने बड़ी मूर्तियों ही नहीं बनाई हैं। छह से सात फुट की मूर्तियां काफी कम ही देखने को मिल सकती हैं।

मां भगवती की मूर्तियों के लिए नवरात्र के दिनों में पहले ही मूर्तिकारों के पास आॅर्डर आने शुरू हो जाते हैं। हर साल तो करीब एक माह पहले ही मूर्तियां आकार लेने लगती हैं, लेकिन इस बार यह कारोबार काफी मंदा नजर आ रहा है। थापर नगर स्थित अजंता मूर्ति कलाकेंद्र के मनोज प्रजापति ने बताया कि हर बार के मुकाबले इस साल कारोबार 60 प्रतिशत ही रह गया है।

वैसे तो हमारे यहां छह से सात फीट की मूर्तियां भी बनाई जाती हैं, लेकिन इस बार चार फीट की मूर्तियों के भी गिने चुने आॅर्डर ही मिले हैं। इसलिए ज्यादा बड़ी मूर्तियां इस बार बनाई ही नहीं गई हैं। बता दें कि यहां की मूर्तियां तैयार होकर कई शहरों में भेजी जाती हैं। इन मूर्तियां की कैराना, बिजनौर, मुजफ्फरनगर में भी डिमांड रहती है, लेकिन इस बार बड़ी मूर्तियों सिर्फ चार फीट की मूर्ति के भी मात्र दो ही आर्डर अजंता मूर्ति कलाकेंद्र को दिए गए हैं।

बंगाली कारीगरों का टोटा, मिट्टी की भी किल्लत

दुर्गा पूजन के लिए मां भगवती की मनमोहक मूर्तियां बंगाली कारीगरों द्वारा ही हर साल तैयार की जाती हैं, लेकिन इस बार संक्रमण में लगे लॉकडाउन के कारण सभी बंगाली कारीगर घर वापस लौट गए। ऐसे में शहर में बंगाली कारीगरों का टोटा हो गया है। माता रानी की मूर्तियों को आकार देने वाले विशेष बंगाली कारीगर शहर भर में नहीं मिल रहे हैं। जिस कारण यहां के मूर्तिकारों को ही मूर्तियां बनानी पड़ रही हैं।

मूर्तिकार मनोज ने बताया कि बंगाल के कारीगरों को दोबारा बुलाया गया, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया। संक्रमण के कारण कोई भी बंगाली कारीगर नहीं मिल रहा है। इसके अलावा पिछले कुछ समय से मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी की भी काफी किल्लत हो रही है। इको फ्रेंडली मूर्तियों की काफी डिमांड रहती है, लेकिन मूर्ति बनोन के जरूरी मिट्टी ही नहीं मिल पा रही है। मिट्टी की कई खदाने बंद होने के बाद से सिर्फ बालू वाली मिट्टी ही मिलती है, जिससे मूर्तियां नहीं बनाई जा सकती।

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