Friday, March 20, 2026
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संजय वन में बनेगा चिड़ियाघर, मेडा ने शासन को भेजा प्रस्ताव

  • एक साल में आठ करोड़ से कराए जाएंगे विकास कार्य
  • लखनऊ की तर्ज पर बनाया जाएगा संजय वन में चिड़ियाघर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जल्द ही संजय वन आर्कषक का केंद्र बनने जा रहा है। संजय वन में लखनऊ की तर्ज पर एक चिड़ियाघर बनाया जाएगा। जिसमें कई तरह के पशु पक्षियां निवास करेंगे। इसके देखने के लिए दूरदराज से लोग आएंगे। इसके लिए संजय वन में तैयारियां शुरू कर दी है। 1990 तक यहां मिनी चिड़ियाघर था। इसमें सैकड़ों प्रकार के पक्षी, हिरन, खरगोश, लोमड़ी और यहां तक कि एक घड़ियाल भी था। बिल्कुल एक मिनी चिड़ियाघर की तरह। घड़ियाल को तैरते देख हर कोई रोमांचित हो उठता था। बजट के अभाव में मिनी चिड़ियाघर को बंद कर दिया गया। यहां जो जानवर थे, उनको जंगल में छोड़ दिया गया। इसके बाद से संजय वन की हालत बदहाल होती चली गई।

दिल्ली रोड शताब्दी नगर स्टेशन के बराबर में संजय वन में एक साल में आठ करोड़ के विकास कार्य कराए जाएंगे। पौने दो करोड़ के कार्य दो महीने में पूरे कर लिए जाएगें। संजय वन में भी जल्द ही चिड़ियाघर का निर्माण होगा। इसमें हिरण, हाथी, शेर, चीता समेत कई जनवरों व पशु पक्षियों को अलग बाड़े में रखा जाएगा। इसके साथ इसमें झूमता मोर, नील गाय के झुंड, खरगोश अचानक वार्किंग ट्रैक पर नजर आएंगे। इसमें सुबह शाम आॅक्सीजन के पार्क में वाक भी अच्छे से होगा। परिवार के साथ बोटिंग का लुत्फ भी उठा सकेंगे।

घने पेड़ों के बीच पंछियों की मीठी गुनगुनाहट सुनते हुए कैफेटीरिया में चाय काफी की चुस्की ले सकेंगे। देखने के लिए लोग दूरदराज से आएंगे। इसके लिए फिलहाल तैयारियां पूरी कर ली है। मेडा ने शासन को इसका प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। ये सब एक साल के अंदर आपको संजय वन में देखने को मिलेगा। लोगों को जानवरों के प्रति जागरूक करने के लिए एक सेंटर भी शुरू किया जाएगा।

  • 12 एकड़ में फैला है संजय वन

12 एकड़ में फैले संजय वन को 1982 में चेतना केंद्र के रूप में स्थापित किया गया था। आसपास के जिलों से यहां पर लोग घूमने के लिए आते थे। 40 साल पहले संजय वन में हिरणों का निवास था। हिरणों की चहल कदमी को देखकर बच्चों से लेकर बड़ों तक के चेहरे खिल जाते थे। पाउंड में तैरते घड़ियाल को देखकर हर कोई रोमांचित हो उठता था। चिड़ियों के बाड़े से अनोखी चहचाहट सुनने को मिलती थी, बरसों से अब वो संजय वन बदहाल था। 3 साल में 20 करोड़ रुपये से इसे शहर के प्रमुख पिकनिक स्पॉट के रूप में संवारा जाएगा। फिलहाल 1.77 करोड़ रुपये के कार्य दो महीने के भीतर पूरे होंगे। 1 साल में 8 करोड़ रुपये की लागत से कार्य कराएं जाएंगे।

  • ये है संजय वन के कायाकल्प का बजट

साल 2016 में वन विभाग ने संजय वन के काय ाकल्प के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण को 1.10 करोड़ का प्रोजेक्ट दिया। मेडा ने अवस्थापना निधि से 25 लाख रुपये जारी किए। जिससे वाच टावर की मरम्मत, पार्क में झूला, नर्सरी एवं ग्रह नक्षत्र वाटिका समेत कई अन्य काम किए गए। समर्पित किया गया। लोगों के घूमने के लिए पेड़ों के बीच वॉकिंग प्लाजा बनाया गया। लोगों के घूमने के लिए वन के भीतर 700 मीटर का एक वॉकिंग ट्रैक बना हुआ है।

इसको पूरी तरह से ठीक कराया जाएगा, जिससे कि लोग यहां सैर कर सकें। संजय वन में बरगद, गूलर, पिलखन, खैर, जामुन, शीशम, सागौन, नीम, आखा, कदम्ब, जंगल जलेबी, बेल, शमी, हरश्रृंगार, अमलतास, हरड़, बहेड़ा, आंवला, कचनार, सेमल, सिरस, कनकचंपा, प्रोसोपिस, अशोक, एलस्टोनिया, गुलमोहर, मौलश्री, कंजी, बबूल, सुबबूल व बांस की विभिन्न प्रजातियां हैं।

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