Sunday, February 22, 2026
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10 फीट चौड़ी सड़क, 20 फीट चौड़ी कांवड़ और 26.5 फीट ऊंचा डीजे

  • गांव के संपर्क मार्ग पर डीजे का निकलना मुश्किल था
  • पावर कारपोरेशन की एमडी ने भी कहा कि कांवड़ 12 फीट की होनी चाहिये
  • एसएसपी ने कहा कि कांवड़ की अनुमति कैसे दी, होगी जांच

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: राली चौहान गांव के युवकों की तरफ से कांवड़ लाने का दूसरा साल था। भारी भरकम डीजे के साथ चल रही कांवड़ का मुजफ्फरनगर के शिव चौक पर ऊंचाई भी नापी गई थी, पूरा रास्ता आराम से गुजारने के बाद गांव का संपर्क मार्ग इनके लिए मुसीबत का सबब बन गया। दस फीट चौड़ी सड़क पार भारी भरकम डीजे लाख बचाने के बाद भी हाइटेंशन लाइन की चपेट में आ गई।

गांव के संपर्क मार्ग पर सुबह से युवाओं का जमावड़ा लगा हुआ था और डीजे को देख कर लोग तरह तरह की बातें करने में लगे हुए थे। कांवड़ियों के साथ आए युवक दीपक सैनी ने बताया कि संपर्क मार्ग पर पहुंचते ही खेत से निकल रही हाइटेंशन की लाइन की चपेट में आ गया। करंट लगते ही पहले कांवड़ संपर्क में आई और कनेक्टर से धुआं निकलने लगा और करंट फैल गया।

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दीपक ने बताया कि ये देखकर वो भागकर आया और कांवड़ से कनेक्शन काट दिया। कनेक्शन कटते ही करंट डीजे में फैल गया और लोग उसकी चपेट में आने लगे। चारों तरफ हाहाकार मच गया और लोग मदद के लिए चिल्लाने लगे। दीपक ने बताया कि देखते देखते छह लोग मर गए और बाकी लोग तड़पते रहे। उस वक्त जो वाहन मिला उससे लोगों को अस्पताल ले जाया गया। आनंद हॉस्पिटल में आठ लोग भर्ती कराए गए। जिसमें छह लोग मारे गए।

बाकी लोगों का इलाज चल रहा है। वहीं, ट्रॉले में सवार छोटे कांवड़ियां वासु ने बताया कि ट्रॉले में ज्यादा लोग नहीं थे। इन लोगों ने कांवड़ पकड़ रखी थी। कुछ लोग मंदिर में जल चढ़ाने उतरे थे, मैं भी उतरा था। तभी यह हादसा हो गया। रामरतन ने बताया कि बहुत फोन के बाद भी पुलिस लेट आई, लोग बाइक पर ही घायलों को लेकर अस्पताल की तरफ भागे।

देरी से पहुंची एंबुलेंस

ग्रामीण रामरतन सैनी ने बताया कि हादसे के एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं आई। दीपक सैनी ने बताया कि एक बार एंबुलेंस वाले ने कहा कि कितनी एंबुलेंस चाहिये है। जब उससे कहा गया कि पांच चाहिये उसके बाद फोन नहीं उठा। बताया कि पुलिस कंट्रोल रुम नंबर 112 पर फोन किया गया था। हर जगह से निराश हाथ लगी थी।

पूरे गांव में फैली हाइटेंशन विद्युत लाइन

ग्रामीणों ने डीएम दीपक मीणा को बताया कि फैक्ट्री के लिए गांव में हाइटेंशन विद्युत लाइन दी गई है। पूरे गांव में हाइटेंशन लाइन फैली हुई है। यहां गांव के पास एक छोटी-सी फैक्ट्री है। उस फैक्ट्री के लिए बिजली विभाग नें हाइटेंशन लाइन दे रखी है। इससे गांव में बिजली सप्लाई होती है। कई बार इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। 2008 में भी शिकायत की थी और आज इतनी बड़ी घटना हो गई है।

अनुमति 12 फीट की, निकाली 26.5 फीट की कांवड़

शिवरात्रि के दिन भावनपुर थाना क्षेत्र के राली चौहान गांव के कांवड़ियों के साथ हुए हादसे और उसमें मारे गए छह लोगों की मौत से हर कोई दुखी है लेकिन इस भीषण हादसे ने कुछ यक्ष प्रश्न खड़े कर दिये हैं जिनके जबाव ढूंढना प्रशासन के लिये चुनौतीपूर्ण होगा। सवाल यह उठ रहा है जब बारह फीट से ऊंची कांवड़ निकालने की अनुमति नहीं थी फिर सड़क पर 26.5 फीट की कांवड़ कैसे उतर गई। इसको अनुमति देने वाले को भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिये।

राली चौहान गांव में अगर कांवड़ में करंट आने का हादसा न होता तो शायद प्रशासन के इंतजाम की पोल न खुलती। कांवड़ शुरु होने से पहले प्रशासन ने खुलकर प्रचार किया था कि कांवड़ शिविर बिना अनुमति के न चलायें जाएं। इसके अलावा बारह फीट से ऊंची कांवड़ न हो और इसमें डीजे की संख्या छह से अधिक न हो। इन नियमों का खुल कर उल्लंघन किया गया।

शहर भर में दर्जनों कांवड़ मानकों की खुलकर धज्जियां उड़ा रही थी। दूसरे राज्यों और शहरों से आई डाक कांवड़ों के अलावा सामान्य कांवड़ों के नियम कानूनों की जांच पड़ताल तक नहीं की गई। अधिकारियों की पहली प्राथमिकता कांवड़ियों को सुरक्षित मेरठ से बाहर जाने की व्यवस्था करनी थी।

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राली चौहान गांव की जिस कांवड़ में हादसा हुआ,उसे कोई भी देखे तो बस यही कहेगा कि इतनी ऊंची कांवड़ हादसे का सबब बन सकती है। दूसरा सवाल यह है कि जब ग्रामीणों ने शट डाउन के लिये संबंधित बिजलीघर के जेई को सूचना दी फिर कैसे शट डाउन लेने के बाद ट्रिपलिंग कैसे होती रही।

नियमों की अनदेखी को लेकर उठ रहे हैं सवाल…

उत्तर प्रदेश के मेरठ में हाई वोल्टेज लाइन की चपेट में आने से छह कांवड़ियों की मौत के बाद यात्रा के दौरान डीजी की ऊंचाई को लेकर स्पष्ट नियमों की अनदेखी किए जाने की बात उठ रही है और इस कारण पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ रही है। इस मामले में मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रोहित सजवाण ने बताया कि इस बात की जांच कराई जा रही है कि ट्रैक्टर ट्राली पर रखे 26 फुट ऊंचे डीजे को आखिर कैसे कांवड़ यात्रा में शामिल होने दिया गया।

उन्होंने कहा कि लापरवाही बरतने वाले पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। दूसरी तरफ इस मामले में ऊर्जा निगम की एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है जो हाई वोल्टेज लाइन से करंट फैलने के बारे में विस्तार से जांच करेगी। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक चैत्रा वी ने बताया कि इस जांच समिति में मुख्य अभियंता, सुरक्षा अधिकारी और एक अधिशासी अभियंता शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा शुरू होने से पूर्व ही चार राज्यों के आला पुलिस अधिकारियों की हाई प्रोफाइल मीटिंग में तय कर दिया गया था कि 12 फुट से ऊंचे डीजे (म्यूजिक सिस्टम) को कांवड़ यात्रा में शामिल नहीं होने दिया जाएगा।

इसके बावजूद 22 फुट ऊंचे डीजे को कैसे अनुमति दी गई और किसी भी जगह उसे नहीं रोका गया। मेरठ में भावनपुर क्षेत्र के राली चौहान गांव से 22 फुट ऊंचे डीजे को ट्रैक्टर-ट्राली में रखकर हरिद्वार तक ले जाया गया और फिर वहां से वापस लाया गया। उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश के इस बीच में मुजफ्फरनगर और मेरठ जिले में दर्जनों थाने और पुलिस चौकियां हैं, लेकिन कहीं भी इतने ऊंचे डीजे को रोकने का प्रयास भी नहीं किया गया।

हैरानी की बात है कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर तैनात किसी भी पुलिस कर्मी या अधिकारी को यह जानकारी क्यों नहीं थी कि कि 12 फुट से ऊंचे डीजे पर प्रतिबंध है। इतना ही नहीं मेरठ में जेल चुंगी पर कांवड़ियों के दो ग्रुपों में होड़ को देखते हुए इस डीजे को कुछ देर रोका भी गया था लेकिन उसकी ऊंचाई को पूरी तरह अनदेखा कर दिया गया। पुलिस की लापरवाही का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि डाक कांवड़ गांव से ले जाने से पूर्व भावनपुर थाने से अनुमति ली गई थी, लेकिन पुलिस ने डीजे संचालक के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की।

अगर नियम के अनुसार ऊंचाई करा के डीजे रवाना किया गया होता तो यह हादसा संभवत: टाला जा सकता था। शनिवार रात मेरठ देहात क्षेत्र के भावनपुर में कांवड़यिों के बिजली के हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आने से छह शिव भक्तों की झुलस जाने से मौत हो गई थी जबकि डेढ़ दर्जन से ज्यादा कांवड़यिे बुरी तरह झुलस गये थे। घायलों का मेरठ मेडिकल कॉलेज अस्पताल समेत कई अन्य निजी अस्पतालों में उपचार चल रहा है।

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