Saturday, March 14, 2026
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छावनी की 1454 एकड़ भूमि निगम को दी जाए: अमित

  • अमित अग्रवाल ने प्रस्ताव तैयार कर रक्षामंत्री और मुख्यमंत्री को भेजा
  • कैंट के सभी धार्मिक स्थल, मैदान, सरकारी दफ्तर नगर निगम को मिले

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कैंट क्षेत्र के सिविल एरिया को नगर निगम को देने के लिए छावनी परिषद द्वारा हाल ही में तैयार किए गए प्रस्ताव के बाद अब कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने भी अपने स्तर से एक प्रस्ताव तैयार करके रक्षामंत्री, रक्षा राज्यमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री और कैंट बोर्ड व नगर निगम के अधिकारियों के साथ-साथ जिला प्रशासन को भेजा है। उन्होंने 1454 एकड़ भूमि नगर निगम को देने की मांग की। इसमें कैंट में स्थित सभी धार्मिकस्थल, खेल के मैदान, पार्क, सरकारी दफ्तर, बैंक, कारखाने, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों नगर निगम को सौंपने का आग्रह किया है।

अपने कैंप कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत में कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने बताया कि मेरठ छावनी की स्थापना दो चरणों में हुई। 1803 में अब्दुल्लापुर, नंगला बट्टू, यादगारपुर, औरंगशाहपुर डिग्गी, कसेरू बक्सर, पीलना सोफीपुर, रोशनपुर डोरली, डाबका, शोभापुर, लाला मोहम्मदपुर, मुस्तुफाबाद बुखारपुरा, खुर्रमपुर, अलीमपुरा आदि गांवों व मेरठ कस्बे की भूमि किसानों से मासिक भत्ते यानी किराये पर ली। द्वितीय चरण में 1859 में न्यू मेरठ कैंट के नाम से फाजलपुर, औरंगशाहपुर गोलाबढ़ व मेरठ कस्बे की भूमि बिना मुआवजा दिए ली गई।

यह भूमि राजस्व लेखों में दर्ज है। अमित अग्रवाल ने कहा कि कैंटोनमेंट का कुल एरिया 8201.58 एकड़ है। कैंट बोर्ड द्वारा मात्र 436.20 एकड़ भूमि को नगर निगम को देने का प्रस्ताव तैयार करके भेजा गया। यह अव्यवहारिक है। कैंट बोर्ड के प्रस्ताव का गहन अध्ययन के बाद उन्होंने 1454 एकड़ भूमि का एक प्रस्ताव तैयार किया। इसमें सभी बंगले, सभी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च, धर्मशालाएं, रैन बसेरे, श्मशान, कब्रिस्तान, गांधी बाग समेत कई पार्क, कई खेल के मैदान, राम वाटिका, सभी स्कूल, इंस्टीट्यूट, मदरसे, कारखाने,

बैंक, सरकारी दफ्तर, सिटी व कैंट रेलवे स्टेशन, रेलवे के गेस्ट हाउस, कालोनी, भैंसाली बस अड्डा, रेपिड रेल का स्टेशन, सभी रेलवे फ्लाईओवर, रेलवे क्रॉसिंग, पुराने सिनेमाघर को शामिल किया गया है। एक सवाल के जवाब में अमित अग्रवाल ने कहा कि कैंट की भूमि पर मालिकाना हक केन्द्र सरकार का बताया जाता है, जबकि उक्त भूमि किसानों से अंग्रेजी हुकूमत ने छीन ली थी। इसका अधिकार जनता को दिया जाए, इसके लिए भी आगे कार्रवाई की जाएगी।

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