जनवाणी संवाददाता |
शामली: एक मार्च 1987 में किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए गांव लिसाड़ निवासी जयपाल मलिक और गांव सिंभालका निवासी अकबर अली को क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
सोमवार सुबह लिसाढ़ स्थित जयपाल मलिक की प्रतिमा पर हवन किया गया। हवन के पुरोहित हरपाल सिंह आर्य व राजवीर सिंह आर्य । यजमान शहीद जयपाल मलिक के छोटे भाई ऋषिपाल मालिक रहे।
इस अवसर पर बोलते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि इस किसान आंदोलन में सभी वर्गों की भागीदारी हो रही है जो लोग नाराज है, उन्हें मनाने की आवश्यकता है।सरकार बहुत अड़ियल है। हम सभी ने वोट देकर सरकार बनवाई थी। अगर हमें कोई परेशानी है तो हम सरकार को ही बताएंगे लेकिन सरकार हमारी नहीं सुन रही है।

किसान आंदोलन शान्ति पूर्ण रूप से चल रहा है और चलता रहेगा।सरकार के सभी हथकंडे इस आंदोलन को तोड़ने में फेल हो गए हैं। अब सरकार के पांव उखड़ रहे हैं। चौधरी नरेश टिकैत ने कहा है कि यह धर्म युग चल रहा है। इसमें सभी किसानों मजदूरों को अपने समय कि आहुति देनी आवश्यक है ताकि आने वाली नस्लों को भी किसान बता सके कि इस आंदोलन का हम भी साथ हैं।
इस आंदोलन को लंबा चलाने के लिए आपको अपनी दिनचर्या में शामिल करना होगा। शहीद जयपाल मलिक और अकबर अली ने किसानों को जागृत रखने के लिए एवं सरकार से संघर्ष के लिए ही अपने खून की आहुति दी थी।धर्मेंद्र मलिक ने कृषि कानून से होने वाली हानि को विस्तार पूर्वक किसानों को समझाया। और जयपाल मलिक की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
इसके बाद गांव सिंभलका में अकबर अली की मजार पर पुष्प अर्पित किए। सिम्भालका में राजबहादुर के आवास पर एक सभा हुई। सभा का संचालन किसान नेता चौधरी अनिल मलिक ने किया।
श्रद्धांजलि सभा में मुख्य रूप से बाबा आजाद मलिक थंबेडदार पुरामहादेव गठवाला खाप, धीरज मालिक, कपिल खटियान, चंद्रपाल दरोगा, पूर्व मंत्री किरणपाल कश्यप, रंधावा मलिक, पूर्व प्रधानाचार्य जयदेव सिंह, धर्मवीर सिंह, सुरेंद्र आर्य, सतवीर मूंछ, कुलदीप पवार, संजीव राठी, दीपक शर्मा, महावीर सिंह आदि मौजूद रहे।

