Sunday, March 15, 2026
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अभी तक शुरू नहीं हो सका 220 एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट

  • 72 एमएलडी के प्लांट पर भी क्षमता से कम हो रहा है कार्य
  • 616 करोड़ की लागत से बनाया जाना था कमालपुर में प्लांट

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन और रखरखाव पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसका लाभ जनता को नहीं मिल रहा है। वर्तमान में जो ट्रीटमेंट प्लांट चल रहे हैं। वह आधी क्षमता से भी कम में चल रहे हैं। जबकि शासन की ओर से यहां मेरठ में 220 एमएलडी का एसटीपी स्वीकृत भी हो चुका था, लेकिन अभी तक वह शुरू नहीं हो पाया है।

यहां एमडीए और नगर निगम के मिलाकर प्लांटों पर करीब 172 एमएलडी ही गंदा पानी ट्रीट किया जा रहा है। जबकि पूरे शहर में सीवेज के माध्यम से ही 300 एमएलडी पानी निकलता है। इसके अलावा शहर के कई नालें हैं। जिनका पानी ट्रीटमेंट नहीं किया जाता और नया प्लांट शुरू होगा तो इन नालों का पानी भी ट्रीट होना आवश्यक है। उसके बाद ही कहीं जाकर यहां के हालात सुधर पाएंगे।

शहर में लगे ट्रीटमेंट प्लांट को देखकर ऐसा लगता है कि विकास के नाम पर शुरू हुई योजनाएं फ्लॉप साबित होती जा रही हैं। इसमें चाहे नमामि गंगे योजना हो या कोई अन्य। सभी पर कार्य अब भी जारी है। अभी तक शहर कई एरियों में सीवेज लाइन तक नहीं बिछ पाई हैं। कुछ लोग अभी भी परेशान हैं कि उनके यहां लाइन तो बिछ चुकी है, लेकिन वहां सड़क नहीं बनी।

यहां नमामि गंगे योजना की बात करें तो केंद्र सरकार ने नदियों को साफ करने के लिए नमामि गंगे योजना के तहत नालों पर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए हैं। करोड़ों रुपये योजनाओं पर खर्च हो रहे हैं, लेकिन नदियों में साफ पानी नहीं पहुंच रहा है। अगर हम काली नदी की बात करें तो उसमें भी सीवर का गंदा पानी पहुंच रहा है। इससे पूरी योजना को पलीता लग रहा है। यहां जिस क्षमता के ट्रीटमेंट प्लांट हैं। वह और भी कम क्षमता में चल रहे हैं और नये प्लांट शुरू नहीं हो सके हैं।

681.78 करोड़ में तैयार होना है 220 एमएलडी का प्लांट

शासन की ओर से 220 एमएलडी एसटीपी के निर्माण की अवधि दो साल रखी गई है, लेकिन यहां यह अभी तक शुरू नहीं हो सका है। यह एसटीपी कमालपुर स्थित 72 एमएलडी एसटीपी के समीप छह हेक्टेयर भूमि पर बनाया जाना है। जल निगम ने जमीन पहले ही फाइनल कर ली थी। विश्व बैंक की मदद से यह एसटीपी बनाया जाना था। इसकी कुल लागत लगभग 681.78 करोड़ है।

इसमें सिविल कंस्ट्रक्शन पर लगभग 363 करोड़ खर्च होंगे। शासन की ओर से यहां योजना तो बनाई गई है, लेकिन इसके साथ ही नगर निगम को नाले में घरों का सीवेज बहने से रोकने का प्रबंध भी करना होगा। दरअसल, शहर के 35 फीसद हिस्सा ही सीवर नेटवर्क से कवर है। एमडीए के 12 एसटीपी हैं, जो विभिन्न योजनाओं में है। इनकी पूरी शोधन क्षमता का उपयोग नहीं हो रहा है। इन एसटीपी से आसपास की उन कालोनियों को सीवर लाइन डालकर जोड़ दिया जाए तो नालों में सीधे सीवेज बहना बंद हो सकता है।

इसके लिए नगर निगम, एसडीए और जलनिगम को प्लान बनाकर काम करने की जरूरत है। शहर में दिल्ली रोड से जुड़े मोहल्लों जैसे जैननगर, देवपुरी से लेकर परतापुर तक सीवर लाइन डालकर इसे भी बड़े एसटीपी से जोड़ने के लिए अब प्लान तैयार करना होगा। ताकि 220 एमएलडी एसटीपी तैयार होने पर शहर की सीवर निस्तारण की समस्या का निदान किया जा सके।

सालों से अधर में है सीवेज लाइन डाले जाने का कार्य

अमृत योजना के तहत जल निगम शहर में सीवर लाइन का काम करा रहा है। योजना के तहत अब तक 90.56 किमी सीवर लाइन डाली जा चुकी है। पुरानी सीवर लाइन मिलाकर अब शहर में करीब 753 किमी का सीवर नेटवर्क तैयार हो चुका है। इससे शहर का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा सीवर लाइन नेटवर्क से कवर हो चुका है। इसके लिए शहर में अधिकतर जलभराव की समस्या से ग्रस्त होने वाले क्षेत्रों की सड़कों को खोदा जा रहा है।

साथ ही अब अमृत 2.0 योजना के दूसरे चरण में शहर के बाकी बचे करीब 55 प्रतिशत हिस्से को कवर करने की कवायद में नगर निगम, जलकल और जलनिगम संयुक्त रूप कार्य कर रहा है। इसके तहत शहर के अधिकतर सभी वार्डों को सीवर लाइन से कवर करने के लिए दूसरे चरण में करीब 11 सौ किमी की सीवर लाइन शहर में डाली जाएगी। इससे सीवर का पानी सीधा ट्रीटमेंट के लिए पहुंचेगा और बरसात का पानी नालियों के रास्ते सीधा नाले में। इस योजना के तहत जल निगम अफसरों ने 1034 किमी सीवर लाइन डालने और फिर हाउस कनेक्शन करने के खर्च का अनुमान करीब 2200 करोड़ लगाया है।

ये चल रहा कार्य

  1. अमृत योजना के तहत शहर में जारी सीवर लाइन का काम
  2. 2015 में शुरू हुआ था योजना का पहला चरण
  3. अब 2022 में शुरू किया जाएगा दूसरे चरण का काम
  4. अब तक इस योजना के पहले चरण में 86.56 किमी का काम हुआ पूरा
  5. 120 करोड़ में पूरा हुआ पहले चरण का काम
  6. पुरानी सीवर लाइन के साथ ही शहर में 753 किमी की सीवर लाइन हुई तैयार
  7. अब 1034 किमी सीवर लाइन डालने और फिर हाउस कनेक्शन करने का काम जारी
  8. इसके लिए खर्च का अनुमान करीब 2200 करोड़
  9. शहर में जल निगम का एक 72 एमएलडी एसटीपी
  10. एमडीए के 12 एसटीपी
  11. जल निगम व एमडीए को मिलाकर सीवेज शोधन क्षमता कुल 179 एमएलडी
  12. प्रतिदिन शहर में 338 एमएलडी सीवेज निकलता है
  13. करीब 159 एमएलडी सीवेज काली नदी में बिना ट्रीट किए बहाया जा रहा है
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