Tuesday, March 31, 2026
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दृष्टिकोण

 

Amritvani 7

 


यह सोनपुर में स्थित छोटे से गांव के गरीब परिवार के दो भाई की कहानी है। एक का नाम सोहन था और दूसरे का नाम मोहन। यह दोनों ही सगे भाई थे पर दोनों की जीवनशैली, जीवन जीने का तरीका बिलकुल ही अलग था। चलो अब प्रकाश डालते है, मोहन के जीवनशैली पर नजर डालते हैं। मोहन बहुत ही गुस्सा वाला था। काम धंधे से ज्यादा व्यसन करना उसके दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा था। गांव वालो को हानि पहुंचाना तथा घेरलू हिंसा का इस तरह करता था जैसे मानो उसका जन्म सिद्ध अधिकार हो। चलो अब प्रकाश डालते है, सोहन के जीवन शैली पर। सोहन बहुत ही शांत स्वभाव वाला युवक था। व्यसन जैसे आदतों से दूर रहता था। वह अपने परिवार को हर तरह की सुख सुविधा उपलब्ध हो इसलिए वह निरंतर संघर्ष करता था। गांव के प्रसिद्ध व्यक्ति से दोनो भाइयों को कहा की आप दोनो एक ही पिता को संतान हो पर आपके विचार इतने अलग कैसे हैं? मोहन ने जवाब दिया, मैं जो भी व्यवहार करता हुं इसमें मेरा कोई दोष नहीं है। इसमें मेरे पिताजी का दोष है। हमारी आर्थिक परिस्थिति बिलकुल भी अच्छी नहीं थी जिसके चलते व्यसन करना, घेरलु हिंसा का बढ़ावा हुआ। पिताजी को देखते देखते मैं भी उनकी तरह बन गया। सोहन जवाब देता है कि मैं भी अपने पिताजी से ही सीखा हूं। मेरे पिताजी की बुरे आदतें व जीवनशैली देखने के बाद बिल्कुल घबरा गया था। समय निश्चित क्या मैं सब कोई कार्य नहीं करूंगा जो मेरे पिताजी ने किया। इससे सीख मिलती है कि हमारा जीवन हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। अगर आपका दृष्टिकोण नकारात्मक है तो आपकी जीवन शैली पर भी नकरात्मकता की शिकार हो जाएगी! अगर आपका दृष्टिकोण सकारात्मक है तो आपके जीवन जीने का तरीका भी प्रभावशाली होगा की लोग आपसे जुड़ने का प्रयत्न करेंगे।


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