- गंदगी से खुद बीमार दिख रहा असीलपुर का उपस्वास्थ्य केंद्र
- सीएमओ ने दिया जल्द उपकेंद्र संचालन का आश्वासन
जनवाणी संवाददाता |
किठौर: असीलपुर का स्वास्थ्य उपकेंद्र आजतक सरकारी उपेक्षा का शिकार है। डाक्टरों की नियुक्ति तो दूर डेढ़ दशक से विभागीय अफसरों ने इसके निरीक्षण तक की जहमत नही उठाई है। नतीजा गंदगी से सराबोर बिल्डिंग क्षतिग्रस्त होती जा रही है। लाखों की लागत से बना यह उपकेंद्र ग्रामींणों के लिए सिर्फ सफेद हाथी है। उपकेंद्र की गंदगी पर मोहल्लेवासियों का कहना है कि जब डाक्टर और दवा ही नही तो केंद्र की सफाई क्यों की जाए?
ग्रामीणों की सेहत का जिम्मा संभालने को असीलपुर में 2006-07 में विभाग द्वारा लाखों की लागत से बनाया गया स्वास्थ्य उपकेंद्र अफसरों की अनदेखी से आजतक वीरान है। विभाग द्वारा स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति तो दूर आजतक बिल्डिंग का निरीक्षण भी नही हो पाया है। उपयोगिता के लिहाज से सफेद हाथी साबित हो रहे उपकेंद्र को मोहल्लेवासी कूड़ेदान के तौर पर प्रयोग कर रहे हैं।

इसलिए गंदगी पसरा यह उपकेंद्र खुद बीमारी का संक्रमण केंद्र दिख रहा है। मोहल्ले वासियों से उपकेंद्र की गंदगी पर बात हुई तो उन्होंने बताया कि गांव को उपकेंद्र का कोई लाभ नही पहुंचा। जब से बना है न तो इसमें कोई स्वास्थ्यकर्मी नियुक्त हुआ न दवाई दी गई। ऐसे में इसमें गंदगी डाली जा रही है। मना करने से कोई मानता नही। सफाई भी क्यों करें जब डाक्टर और दवाई यहां नही हैं।
बताया गांव में एक एएनएम पांच आशाएं, पांच आंगनबाड़ी, पांच सहायिका हैं। जो कभी-कभी सार्वजनिक स्थलों पर कैंप लगाती हैं। बताया कि पहले एएनएम पूजा नियुक्त थी। फिलहाल वह अवकाश पर है। एक अन्य एएनएम कभी-कभी गांव आती है। वहीं प्रधानपति मौ. खालिद का कहना है कि विभागीय कार्यों की खानापूर्ति के लिए कभी-कभार ब्लाक से सीएचओ आता है, लेकिन सेंटर नही खुलता।
जनसंख्या पर बनते हैं हेल्थ सेंटर
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र जनसंख्या के अनुसार बनाए जाते हैं। 10 हजार आबादी पर एक सब सेंटर, 30 हजार पर पीएचसी व ब्लॉक स्तर पर सीएचसी। बताया कि सरकार ने प्रत्येक स्वास्थ्य उपकेंद्र पर एक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर चलाना सुनिश्चित किया है। जिसके लिए सीएचओ को प्रशिक्षित किया गया है। सीएचओ अपने हेल्थ सेंटर से जुड़े लोगों के हाइपरटेंशन, शुगर, बीपी, टीबी, कैंसर की जांच कर रोगियों को केंद्र पर ही दवाई उपलब्ध कराएंगे।

