जनवाणी ब्यूरो |
लखनऊ: देश की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संचालित कराये जा रहे “आजादी का अमृत महोत्सव’ अभियान के अंतर्गत 1 जुलाई से 7 जुलाई तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सप्ताह कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसी के तहत राज्य स्तर पर कृषि भवन लखनऊ में कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख की अध्यक्षता में फसल बीमा सप्ताह उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव कृषि डा. देवेश चतुर्वेदी, कृषि निदेशक विवेक कुमार सिंह, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण निदेशक आरके तोमर एवं कृषि सांख्यिकी एवं फसल बीमा निदेशक राजेश कुमार गुप्ता द्वारा प्रदेश के 5 जनपदों लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई व बाराबंकी के प्रचार वाहनों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया।
औलख ने बताया कि कृषकों की आय दोगुनी करने की दिशा में एवं आपदा के समय कृषकों की आय को स्थिर रखने में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एक महत्वपूर्ण स्तम्भ है। यह कृषकों को किसी भी प्रकार की दैवीय आपदा के विरूद्ध उनकी अधिसूचित फसलों को बीमा कवर प्रदान करते हुए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। यह योजना किसानों को कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीक, आधुनिक संसाधन एवं उन्नत किस्म के बीजों का उपयोग कर उत्पादन को बढ़ाये जाने हेतु प्रोत्साहित करती हैं। इस प्रकार बीमित कृषक न केवल अपनी आय में वृद्धि करता है बल्कि प्रदेश एवं देश की खाद्यान्न सुरक्षा में अपने योगदान की प्रमुखता को बनाए रखता है।
डा. देवेश चतुर्वेदी, अपर मुख्य सचिव, कृषि ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अपनाने वाले कृषकों को भी हृदय से बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूँ तथा उनके प्रति आभार प्रकट करते हुए आवाहन करता हूँ कि प्रदेश के सभी कृषक योजना अंतर्गत आच्छादित होकर प्राकृतिक आपदाओं से अपनी फसल को सुरक्षा प्रदान करें। उन्होंने यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को स्वैच्छिक कर दिया गया है, जो किसान भाई अपनी फसल बीमा नहीं कराना चाहते हैं, उनको खरीफ मौसम के अंतर्गत बीमा कराने की अन्तिम तिथि 31 जुलाई के 7 दिन पूर्व अपनी बैंक शाखा में जाकर बीमा नहीं करने विषयक प्रार्थना पत्र देना होगा अन्यथा की दशा में बैंक द्वारा उनके खाते से पैसा काटते हुए कृषक के फसल का बीमा कर दिया जायेगा। साथ ही बीमा कंपनियों को निर्देशित किया गया है कि वह असफल बुआई, मध्यावस्था क्षतिपूर्ति एवं व्यक्तिगत आधार पर प्राप्त प्रार्थना पत्रों का त्वरित गति से समयान्तर्गत सर्वे पूर्ण कर क्षतिपूर्ति की कार्यवाही करें। साथ ही अन्य क्षतिपूर्ति को भी समय से कृषकों को उपलब्ध करायें।

