- पीडब्ल्यूडी में हुए तबादलों का मामला, दैनिक जनवाणी ने भी प्रमुखता से उठाया था मुद्दा
- हाल ही में लगभग 200 अभियन्ताओं के हुए थे तबादले
- मेरठ के कई अभियन्ता अब भी अपने तबादले बदलवाने की फिराक में
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: लोक निर्माण विभाग में हाल ही में प्रदेश भर में हुए तबादलों के बाद रार पैदा हो गई है। इस संबंध में खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा संज्ञान लेने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। हाल ही में काफी जद्दोजहद के बाद पीडब्ल्यूडी के लगभग 200 ऐसे अभियन्ताओं को इधर से उधर किया गया था, जो मंडल व जनपद में अपनी पोस्टिंग की टाइम लाइन को क्रॉस कर चुके थे।
इसमें मेरठ के भी कई अभियंता शामिल थे। गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व प्रदेश में 28 सहायक अभियंताओं के तबादले हो गए थे जिन पर अच्छा खासा हंगाम हुआ था और इस प्रकरण में विभाग के राज्य मंत्री तक ने हस्तक्षेप किया था और अंत में सभी 28 सहायक अभियंताओं की सूची को ही निरस्त कर दिया गया था।
इसके कुछ दिनों बाद तबादलों का जिन्न फिर बोतल से बाहर आया और प्रदेश भर में लगभग 200 अभियन्तओं के बम्पर तबादले कर डाले गए। ये वो अभियंता थे जिनका मंडल व जिले में तैनाती की समय सीमा पूरी हो चुकी थी, लेकिन यह फिर भी विभाग में जमे हुए थे। इस संबध में दैनिक जनवाणी ने भी प्रमुखता से इस मुद्दे को उठाया था।
विभागीय सूत्रों के अनुसार जिन 200 लोगों के तबादले हुए थे उनमें से कई ने अपने ‘साम दाम दंड भेद’ का इस्तेमाल कर तैनाती स्थल मनचाहा करवा लिया। हालांकि सूत्र यह भी बताते हैं कि मेरठ से स्थानांतरित हुए अभियंताओं की तैनाती स्थल नहीं बदले गए जबकि कोशिश यहां के अभियन्ताओं ने भी की थी।
अब लोक निर्माण विभाग में हुए तबादलों में ‘खेल’ की सूचना लीक हुई और यह मुख्यमंत्री तक जा पहुंची। इसके बाद उन्होंने फौरन कार्रवाई करते हुए जांच कमेटी बना दी जिसमें कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज सिंह, अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी व देवेश चतुर्वेदी शामिल हैं। अब मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले में सीधा हस्तक्षेप करने और जांच रिपोर्ट फौरन मांगने से उन चेहरों की हवाइयां उड़ी हुई हैं। जिन्होंने इसमें ‘खेल’ किया है।

