जनवाणी ब्यूरो |
लखनऊ: अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। प्रदेश में डेंगू का प्रकोप बढ़ रहा है। अब तक इससे कई मौंते हो चुकी हैं। कई हजार डेंगू केस दर्ज किए जा चुके हैं। अस्पतालों में बीमारों की कतारें लगी हुई है। बुखार, उल्टी, दस्त के बीमार बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। दिल के मरीजों की देखभाल भी ठीक से नहीं हो पा रही है। ठण्ड की शुरूआत में ही प्रदेश में मरीजों का हाहाकार मचना शुरू हो गया है।
भाजपा सरकार ने कोरोना काल में जिस तरह लोगों को अनाथ छोड़ दिया था, वही रवैया इन दिनों भी दिखाई पड़ रहा है। मुख्यमंत्री को निर्देश पर निर्देश देने का शौक है तो स्वास्थ्य मंत्री जी को छापेमारी से फुर्सत नहीं है। लेकिन इस सबके कोई नतीजे नजर नहीं आते हैं। सरकारी अस्पतालों में हालत वही ढाक के तीन पात वाली दिखती है।
डेंगू के खतरे से भाजपा सरकार जिस तरह जानकर भी अनजान बनी हुई है वह खतरनाक स्थिति है। चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू वायरस के शिकार मरीज को दूसरा स्ट्रोक बेहद खतरनाक साबित होगा। इस सबसे नागरिकों में दहशत फैल रही है। जगह-जगह कूड़े के ढेर हैं। अस्पतालों में मरीजों के प्रति लापरवाही हो रही है। उससे लोग आतंकित हैं। उनमें सरकार के प्रति गहरा असंतोष पैदा हो रहा है।
एक हकीकत यह भी है कि जहां-जहां भाजपा के मेयर, चेयरमैन हैं वहीं पर हालात ज्यादा बिगड़े हुए हैं। वहां न सफाई है और नहीं फागिंग हो रही है। मच्छरों के प्रकोप से बचाव के कोई इंतजाम नहीं है। खुद दफ्तरों-अस्पतालों में भी लार्वा पनप रहे हैं। लार्वा को नष्ट करने का सुनियोजित अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा है?
सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री जो स्वास्थ्य मंत्री भी हैं। जमीनी हकीकत पर उनका ध्यान नहीं जाता है। पता नहीं मुख्यमंत्री की मशहूर इलेवन और नाइन टीमें कहां गई और इलाज तथा दवा की व्यवस्था में इतनी ढील क्यों हो रही है?
उनको अब जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति और अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर करने की सुध आ रही है जब हालात बेकाबू होने को है। मरीजों की देखभाल सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए पर भाजपा सरकार की प्राथमिकता में तो चुनाव और सत्ता के लिए नई-नई तिकडमें करना और झूठी बयानबाजी करना भर रह गया है।

