- फ्लाईओवरों पर दोपहिया वाहनों का निकलना मुश्किल
- डंपरों की मिट्टी ढुलाई ने बढ़ाई परेशानी, नगर निगम खामोश
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कहने को पंजाब की पराली को बढ़ते वायु प्रदूषण के लिये दोषी ठहराया जा रहा है। अगर आप दिल्ली रोड और बागपत रोड की सड़कों और फ्लाईओवरों को देख लें तो हकीकत पता चल जाएगी कि सड़कों के डिवाइडरों के किनारे बालू और मिट्टी के ढेर ने लोगों की जिंदगी दूभर कर दी है।
पूरे समय धूल का गुबार धुंध के रुप में छाया रहता है और दोपहिया वाहनों के लिये मुसीबतें खड़ी कर रहा है। इससे न केवल सांस के मरीजों को परेशानियां हो रही है बल्कि स्वस्थ इंसान भी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। नगर निगम पहले नियमित रुप से सड़कों से धूल उठाने का काम करता था, लेकिन अब उस पर भी ब्रेक लग गया है।
दिल्ली रोड और रुड़की रोड पर रैपिड के काम के कारण जहां ट्रैफिक समस्या से लोग परेशान हैं अब सड़कों पर लगने वाले मिट्टी और धूल के ढेर से लोगों को सांस लेने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रैपिड निर्माण के कारण रोज रात में 200 से अधिक डंपर मिट्टी लेकर निकलते हैं और रास्ते भर मिट्टी गिराते हुए चलते है। जब तक मिट्टी निकल रही थी तब तक कोई समस्या नहीं थी, लेकिन गहरी खुदाई में बालुई मिट्टी निकलने के कारण डंपरों से मिट्टी सड़कों पर गिर कर डिवाइडरों के पास जमा हो रही है।

कई जगहों पर एक फीट से अधिक मिट्टी जमा हो चुकी है। सबसे बुरी स्थिति मेवला पुल और मलियाना पुल की है। इन पुलों पर दोपहिया वाहनों का निकलना उस वक्त दूभर हो जाता है जब आगे से ट्रक या बड़ा वाहन निकलता है। हैरानी की बात यह है कि नगर निगम के सफाई कर्मचारियों ने भी हाथ खड़े कर दिये हैं। उनका कहना है कि सड़क से मिट्टी हटाना अब उनके वश की बात नहीं है।
प्यारे लाल शर्मा जिला अस्पताल में इस वक्त सांस के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है और इसके लिये वायु प्रदूषण मुख्य माना जा रहा है। अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज के लिये अब्दुल बशीर का कहना था कि केसरगंज से रिठानी तक रोज आने में इसी धूल के कारण फेफड़ों में संक्रमण हो गया है। अकेले बशीर ही नहीं है, इनके जैसे काफी संख्या में बुजुर्ग और युवा खांसी के कारण परेशान है। जिला अस्पताल में मेडिसिन विभाग में लगी मरीजों की लाइनों में इस दर्द को आसानी से देखा जा सकता है।
मेट्रो की खुदाई के दौरान निकलने वाली मिट्टी को रात के समय ट्रकों से इसकी ढुलाई की जाती है, लेकिन इन ट्रकों को सही ढंग से कवर्ड नहीं किया जाता। जिसकी वजह से डंपरों से खिसक कर मिट्टी पूरी सड़क पर फैल जाती है। यह प्रतिदिन का काम हो गया है। ऐसी स्थिति में नगर निगम की टीम के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुका है। फिर भी नगर निगम की टीम की ओर से व्यवस्था में सुधार का प्रयास किया जा रहा है।
-डा. हरपाल सिंह, प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारीनगर निगम का आरोप पूरी तरह से गलत है। मिट्टी लेकर निकलने वाले डंपरों के पहिये तक धोने के बाद निकाला जाता है। डंपर पूरी तरह से ढका रहता है। इसके अलावा वाटर स्प्रिंकर के जरिये सड़कों पर दिन में कई बार पानी का छिड़काव होता है। जब डंपर मिट्टी डालकर वापस आता है तो उसकी फिर से धुलाई होती है।
-पुनीत वत्स, प्रवक्ता एनसीआरटीसीवायु में उड़ रहे धूल और बालू के कणों के कारण लोगों को फेफड़े की बीमारियों की समस्या खड़ी हो सकती है और आंखों को भी नुकसान होता है। निमोनिया और वायरल में यह और परेशानी खड़ी कर रहा है। इस तरह के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सड़कों पर रेगुलर धूल और मिट्टी हटनी चाहिये और संबंधित विभागों को पहल करनी चाहिये।-डा. वीरोत्तम तोमर, चेस्ट स्पेशलिस्ट

