जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आरटीआई कार्यकर्ता ने शस्त्र लाइसेंसों का मामला उठा कर एक बार फिर से हलचल पैदा कर दी है। कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने आयुध नियमावली के तहत जारी किये गए शस्त्र लाइसेंसों की जांच सीबीआई से कराने की मांग शासन से की है। अब हाईकोर्ट ने इस संबंध में सभी जनपदों के जिलाधिकारियों से जबाव मांगा है। माना जा रहा है कि प्रशासन इस मामले में अपराधिक छवि वालों के लाइसेंस निरस्त कर सकते हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने बताया कि कानपुर के विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद हाईकोर्ट में जब इस तरह की याचिका दाखिल हुई तो शासन से लेकर प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अब हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से सूची समेत जबाव मांग लिया है।
सरकार ने भी सख्त रुख अपनाते हुए अपराधिक छवि वाले लोगों को जारी शस्त्र लाइसेंसों को निरस्त करने के आदेश दिये हैं। हाईकोर्ट ने 2012 में प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस पर रोक लगा दी थी। केंद्र ने आयुध अधिनियम 2019 लागू किया तो हाईकोर्ट की रोक खत्म हो गई।
सभी जनपदों ने जिलाधिकारियों ने जुगाड़ वाले लोगों को छोड़कर किसी के लाइसेंस नहीं बनाए। बिकरु कांड के बाद पता लगा कि अपराधिक छवि वालों को तमाम जनपदों में लाइसेंस दिये गए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने जनहित याचिका दायर करके नई आयुध नियमावली के तहत प्रत्येक जनपद में जारी किए गए हथियारों के लाइसेंस की जांच सीबीआई से कराने की मांग की।
इस कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। इसको देखते हुए शासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने सभी पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी और एसएसपी को ऐसे लाइसेंसधारियों के लाइसेंस निरस्त करके प्रमाणपत्र भेजने का सख्त निर्देश दिया है। ऐसे लोगों की तलाश के लिए डीएम ने एडीएम प्रशासन, एडीएम सिटी, सभी एसडीएम, एसपी और सीओ की जिम्मेदारी लगाई है।
इस वक्त जनपद में लगभग 17,249 लाइसेंस हैं। 2019 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लगभग 200 नये लाइसेंस जारी किए गए। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना का कहना है कि जिला प्रशासन ने शस्त्र लाइसेंस को अपना निजी अधिकार मान लिया है। सभी जनपदों में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को नई नीति लागू होने के बाद भी खूब लाइसेंस दिए गए हैं।

