
कहते हैं कि भारत पर्व-त्योहार-उत्सव का देश है। हर दिन किसी न किसी धर्म-पंथ-विश्वास या लोक के दर्जनों पर्व होते हैं। धर्म-आस्था कभी शक्ति प्रदर्शन या अन्य मान्यता से बेहतर बताने का माध्यम रहा नहीं। इस बार रामनवमी पर देश के विभिन्न हिस्सों में जिस तरह बवाल हुए, वह दुनिया में भारत की उत्सवधर्मी छवि पर विपरीत असर डालते हैं। दुर्भाग्य है कि सोशल मीडिया टुकड़ों में वीडिया क्लिप से भरा हुआ है और हर पक्ष केवल दूसरे का दोष बता कर सांप्रदायिकता को गहरा कर रहा है। ये तो तय है कि जहां भी दंगे हुए, वहां कुछ राजनेता थे और हर जगह प्रषासन निकम्मा साबित हुआ। न खुफिया पुलिस ने काम किया, न ही सुरक्षा में तैनात बलों ने तत्परता दिखाई।