Monday, April 13, 2026
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नोडल अधिकारी शहर में, गोवंश सड़कों पर

  • कान्हा उपवन गोशाला का किया निरीक्षण, मिला सबकुछ ओके
  • महानगर की सड़कों पर आवारा गोवंश बेशुमार, निरीक्षण के दौरान नहीं दिया किसी ने इस पर ध्यान
  • लखनऊ से आए नोडल अधिकारी विशेष सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त उत्तर प्रदेश शासन ने किया दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: महानगर की सड़कों पर आवारा गोवंश बेशुमार है, जितना गोवंश गोशाला में है। उससे कई गुणा गोवंश सड़कों पर दयनीय हालत में घूमता देखा जा सकता है। लखनऊ से बुधवार को आये विशेष सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त प्रदेश शासन सीधे परतापुर बराल की कान्हा उपवन गोशाला पहुंचे।

वहां पर निरीक्षण किया इस दौरान निगम के प्रभारी स्वास्थ्य चिकित्सा एवं पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डा. हरपाल सिंह ने बताया कि सबकुछ गोशाला में ओके मिला। जिसके बाद वह निरीक्षण कर वापस लौट गये। वहीं आवारा गोवंश को पकड़कर गोशाला में लाये जाने के निर्देश भी दिये, लेकिन उन्होने सड़कों पर कितना गोवंश घूम रहा है, उसका निरीक्षण नहीं किया, यदि निरीक्षण धरातल पर किया होता तो किसी न किसी अधिकारी पर गाज गिरना तय था।

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उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में गोवंश का रखरखाव एवं उसका पालन शामिल है। जिसके अंतर्गत सरकार के द्वारा प्रतिमाह करोड़ों रुपये उस पर खर्च किये जाते हैं, लेकिन योजना धरातल पर कितनी सफल हो रही है। उसको लेकर शासन तक सही रिपोर्ट नहीं पहुंच पाती। जिसके चलते स्थानीय स्तर पर योजनाओं के सफल संचालन में गड़बड़ी देखी जा सकती है।

इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि महानगर की सड़कों पर हजारों की संख्या में आवारा गोवंश बेशुमार हालत में घूमता देखा जा सकता है। वहीं, गोशाला में जो गोवंश है, वह भी दयनीय हालत में दिखाई देता है। चार दिन पूर्व जनवाणी ने इस संबंध में समाचार भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था, लेकिन तीन-चार दिन के अंदर ही शासन के निर्देश पर लखनऊ से विशेष सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त नोडल अधिकारी के नेतृत्व में टीम मेरठ पहुंची और परतापुर स्थित कान्हा गोशाला का निरीक्षण किया।

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निरीक्षण के दौरान गोशाला की साफ-सफाई एवं पशुओं के लिये चारे की समुचित व्यवस्था को देखी और कुछ बीमार पशुओं के इलाज के लिये निर्देश जरूर दिया और सड़कों पर खुले में पशु घूम रहे हैं, लेकिन उन्होंने सड़कों पर शायद खुद निरीक्षण नहीं किया कि कितने आवारा गोवंश सड़कों पर घूम रहे हैं। वहीं यदि वह बिना प्रस्तावित कार्यक्रम के किसी दिन गोशाला का औचक निरीक्षण कर लें तो सच्चाई उनके सामने आ जायेगी कि वास्ताविकता क्या है।

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