
पिछले दिनों प्राकृतिक आपदा यानि बेमौसम की घनघोर बारिश और बेतादाद ओले पड़ने की घटना ने किसानों को खून के आंसू रुला दिए और उनकी गेहूं, सरसों व रबी की अन्य फसलों को बर्बाद कर दिया। पंजाब हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश के अधिकतर किसानों की सरसों की फसलें बेमौसम बारिश में बर्बाद हो गर्इं और जो कुछ मंडियों में पहुंची, उसके सही दाम किसानों को नहीं मिले। केंद्र की मोदी सरकार ने खुद ही पिछले साल 2021-22 में देश में सरसों का भाव 7 हजार 444 रुपए प्रति कुंटल तय किया था। लेकिन इस बार किसानों को सरसों का बढ़ोतरी के सात उचित भाव तो छोड़िए, पुराना भाव भी नहीं मिल रहा है। इस साल किसानों को सरसों का बाजार भाव महज 4 हजार 500 रुपए प्रति कुंटल तक ही मिल पा रहा है। इस प्रकार से एक ही वर्ष में एक कुंतल पर सीधे-सीधे करीब 3 हजार रुपए का घाटा किसानों को हो रहा है।