
ऐ शहीदे मुल्को मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार/अब तेरी हिम्मत का चर्चा गैर की महफिल में है। अजीमाबाद त्रपटनात्न के स्वतंत्रता सेनानी/शायर बिस्मिल अजीमाबादी (कुछ लोगों के अनुसार ऐतिहासिक काकोरी ऐक्शन के शहीद रामप्रसाद बिस्मिल, जो अपने नामराशि अजीमाबादी की ‘सरफरोशी की तमन्ना’ के मुक्तकंठ प्रशंसक थे) की ये काव्यपंक्तियां 1857 में लड़े गए देश के पहले स्वतंत्रता सग्राम के हरदिलअजीज महानायक मौलवी अहमदउल्लाह शाह के व्यक्तित्व और कृतित्व के सिलसिले में इतनी मौजूं हैं कि लगता ही नहीं कि इन्हें उनकी शहादत के कई दशकों बाद रचा गया।