Saturday, February 21, 2026
- Advertisement -

छह अर्थियां उठीं तो कांप गए कलेजे

  • पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचे तो मचा हाहाकार, महिलाओं की हालत खराब
  • मृतक महेन्द्र ही कमाने वाला था, बेटी रोती रही डीएम, एसएसपी के सामने
  • डीएम ने कहा-पढ़ाई जारी रखो, हर संभव मदद की जाएगी
  • वक्त ने पल भर में भोले के जयकारों को आंसुओं में तब्दील कर दिया
  • पूरे दिन गांव में रहा हाहाकार, गलियों में रहा सन्नाटा और दिखाई दी सिर्फ नम आंखे

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: भावनपुर थाना क्षेत्र का वो राली चौहान गांव जहां शनिवार को शिवरात्रि की शाम 11 के वी की हाइटेंशन की कू्रर लाइन ने चार मासूम किशोर सहित दो अन्य को मौत की आगोश में ले लिया था। वहीं, जब रविवार की दोपहर ग्रामीण और प्रशासन छह शव एक साथ लेकर गांव में पहुंचे तो यह देखक र सभी का कलेजा कांप गया।

सफेद चादरों के कफन में लिपटे दो सगे भाई प्रशांत (15) उसका छोटा हिमांशु (13) और मनीष (18) व सुनील का बेटा (10) लक्ष्य और लख्मी, महेन्द्र के शवों को जैसे ही नीचे उतारा तो पूरा गांव चित्कार उठा। गांव की महिलाएं और युवा से लेकर उम्रदराज बूढ़े भी अपनी अांखों के आंसू नहीं रोक पाये। एक पंक्ति में लिपटे छह शवों को देखकर सैकड़ों ग्रामीणों से रहा नहीं गया।

18 18

सभी शांत और बेबस हालत में पथराई आंखों से उन शवों को निहारकर असहज हो चुके थे। प्रशांत हिमांशु की मां ने बेटों के चेहरे को देखा तो बेसुध होकर वहीं गश खाकर गिर पड़ी। उधर, यही हाल मासूम लक्ष्य और मनीष की मां का भी था। बेटों के शवों को देखकर मां बेहोश हुई जा रही थी। सभी महिलाएं रोते हुए उन्हें संभालने में लगी थी। वहीं, महेन्द्र की पत्नी अंजू और लख्मी की पत्नी रेखा भी पतियों के शव को देखने पहुंची तो उनसे नहीं रहा गया।

14 15

दोनों शवों से लिपटकर रोने लगीं और वहीं गिर गई। शवों के आसपास खड़े ग्रामीण और महिलाएं उन्हें वहां से किसी तरह हटाते तो वे उनसे लिपटकर पतियों को वापस लाने की बात कहते हुए रोने लगती। शवों को देखने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा था। एक ही पंक्ति में रखे गए छह शवों को देखकर हर किसी का कलेजा फटने को तैयार था। पूरे गांव में मातम पसरा था।

10 14 11 18

ऐसा हृदय विदारक दृश्य देखकर प्रतीत होता था कि इन छह मौतों ने पूरे गांव को अपने में समेट लिया है। सबकी आंखों में एक ही सवाल था कि आखिर ऐसा क्यों हो गया? आखिर शिवरात्रि पर गांव को किसकी नजर लगी और इतना बड़ा हादसा हो गया। दोपहर तक ग्रामीण डीएम दीपक मीणा को बुलाने की मांग पर अड़े थे। ग्रामीणों ने दाह संस्कार के लिए तब तक मनाकर दिया था, जब तक डीएम उनके सामने आकर उनकी व्यथा न सुन ले।

डीएम दीपक मीणा सवा तीन बजे के आसपास जैसे ही गांव पहुंचे तो ग्रामीणों एवं परिजन आक्रोशित हो गए, लेकिन जैसे-तैसे ग्रामीणों को समझा-बुझाकर दाह संस्कार के लिए मनाया गया। शाम के वक्त जैसे ही छह अर्थियां एक साथ उठी तो मृतकों के परिजन बेसुध हो गए। महिलाएं बेहोश होकर जमीन पर गई। वहीं, गांव के किशोर और युवा भी छह अर्थियां देखकर रो उठे। जैसे-जैसे लोग अर्थियां लेकर दाह संस्कार के लिए आगे बढ़ रहे थे। वैसे ही ग्रामीण आंखों में आंसू लिए उनके पीछे चल रहे थे।

17 19

सभी के मुंह से यही शब्द बयां हो रहे थे कि आखिर बहुत बुरा हुआ। शाम को सभी शवों का ग्रामीण और प्रशासनिक अफसरों की मौजूदगी में दाह संस्कार किया गया। रात होते ही पूरे गांव में मातम पसरा था। पूरे गांव के घरों में किसी का भी चूल्हा नहीं जला था। सभी लोग आसमान की ओर निहार कू्रर हादसे को बयान कर रहे थे।

राली चौहान में मचा हाहाकार, सूनी गलियां और आंखें नम

जिस राली चौहान गांव में बच्चों से लेकर महिलायें अपने लाड़लों के द्वारा लाई गई कांवड़ को देखने के लिये गांव के बाहर खड़े होकर इंतजार कर रही थी, उसी गांव में कांवड़ उनके लिये खुशियां लाने के बजाय जिंदगी भर का दर्द दे गई। गांव के मंदिर में भोले के जयकारे वाले भजन सभी को शिवमय कर रहे थे, लेकिन वक्त ने गांव के माहौल को पल भर में नेस्तनाबूद कर दिया। रविवार को पूरे दिन गांव में हाहाकार मचा रहा। गलियों का सन्नाटा दर्द को बयान कर रहा था। अगर कुछ था तो सिर्फ लोगों की नम आंखे।

13 15

गांव के लोगों ने सामूहिक रुप से सोचा था कि भीमकाय कांवड़ जब गांव में आएगी और उसके साथ चलने वाले बीस से अधिक युवक गांव के मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे तब सभी को पुण्य का लाभ होगा। शनिवार की शाम साढ़े सात बजे के करीब कांवड़ छिलौरा संपर्क मार्ग पर दाखिल हुई और बमुश्किल 50 कदम चली होगी तभी हाइटेंशन की लाइन की चपेट में आने से छह की मौत हो गई और एक दर्जन के करीब घायल हो गए।

युवकों की मौत की खबर गांव में आग की तरह फैल गई। देखते देखते काफी संख्या में ग्रामीण एक सांस में मौके पर पहुंच गए। कितना दर्दनाक माहौल था, करंट से तड़प रहे लोग मदद के लिये पुकार लगा रहे थे, लेकिन ऐसे कोई वाहन नहीं थे जिनसे इनको अस्पताल ले जाया जा सके। तमाम प्रयासों के बाद भी छह लोगों को बचाया नहीं जा सका। छह शवों को मोर्चरी में दाखिल कर दिये गए थे। रात पूरी रोते हुए कट गई।

जिनके घरों के चिराग बुझे थे उनके घर के छोटे बच्चों की आंखे आंसुओं से सूज गई थी और जमीन पर रोती बिलखती मां के पास सो गए। इन परिवारों की सोचने की शक्ति क्षीण हो गई थी। जिनके लाल इस दुनिया से चले गए थे उनकी मांये बस यही कह रही थी भोले क्या बिगाड़ा था मेरे बेटों ने जो तूने मेरी खुशियां छीन ली। अब कैसे मैं तुमको पूजूंगी, मेरी गोद में फिर से मेरे लाल को दे दे। गांववासी सुरेश के दो बेटे इस हादसे का शिकार हुए। बच्चों के शव के पास बैठे पिता बस यही कहते रहे कि दोनों बच्चे चले गए।

19 15

किसको क्या कहूं? सुरेश गांव में परचून दुकान चलाते हैं। सुरेश फर्श पर बैठे बड़बड़ा रहे थे। मेरा बेटा आठवीं में पढ़ रहा था। एक 10वीं में आया था और वो चला गया। भोले अब कौन मेरे साथ रहेगा। सुरेश के बेटे हिमांशु उम्र 14 साल और प्रशांत उम्र 16 साल की मौत हो गई है। जबकि तीसरा बेटा विशाल उम्र 18 साल बुरी तरह जख्मी है। प्रशांत कांवड़ लेने गया था, जबकि हिमांशु और विशाल भाई को लेने उसकी कांवड़ देखने पहुंचे थे। तभी हादसा हुआ।

बेटी बोली-डीएम अंकल मेरी पढ़ाई कौन कराएगा

कहते है इंसान के सिर पर पिता का साया उसे न केवल ताकतवर बनाता है बल्कि उसके लिये आर्थिक और सामाजिक रुप में कवच का काम करता है। हाइटेंशन लाइन के करंट से मरने वाले छह लोगों में महेन्द्र भी है। इसकी मौत ने परिवार में पत्नी, बेटी और बेटे के सपनों को बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

महेन्द्र ही घर में इकलौता कमाने वाला था। डीएम दीपक मीणा और एसएसपी रोहित सिंह सजवाण के सामने इंटर पास कर चुकी तनीषा ने रोते हुए कहा अंकल अब मेरे घर का खर्चा कैसे चलेगा और मेरी पढ़ाई कौन करवाएगा क्योंकि मुझे आईएएस बनना है।

बेटी तनीषा की मार्मिक वेदना को सुनकर डीएम ने कहा बेटी तुम परेशान मत हो। तुम्हारी पढ़ाई की व्यवस्था हर हाल में होगी। तुमको किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी। शासन से पांच लाख रुपये की मदद मिलेगी और एक लाख रुपये बिजली विभाग वाले देंगे।

तनीषा रोते हुए बोली परिवार में कमाने वाले सिर्फ पापा थे। छोटा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है। वहीं, एसएसपी ने कहा कि अगर परिवार की सुरक्षा की बात है तो उसकी व्यवस्था तुरंत करा दी जाएगी। बेटी की गमगीन बातों को सुनकर आसपास खड़े लोग भी द्रवित हो गए।

डीएम ने की प्रमुख सचिव गृह से बात

राली चौहान गांव में हादसे के बाद प्रशासन पर आर्थिक मुआवजे को लेकर जबरदस्त दबाव था। डीएम और एसएसपी काफी समय तक गंगा नगर थाने में रहे। सूत्रों ने बताया कि डीएम ने प्रमुख सचिव संजय प्रसाद से बात की और कहा कि ग्रामीण बना मुआवजे के शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे और माहौल तनाव वाला है। शासन की तरफ से कोई घोषणा होनी चाहिये। बाद में शासन की तरफ से डीएम से कहा गया कि पांच लाख तक की घोषणा कर दो। इसके बाद डीएम गांव गए और परिजनों से बात कर मदद की घोषणा की।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

टॉप डायरेक्टर्स में शामिल हुए अनुराग सिंह

एक से बढ़कर एक कॉमेडी और पीरियड वॉर जॉनर...

सिर्फ फिल्म नहीं, कड़वा सच है अनुभव सिन्हा की ‘अस्सी’

डायरेक्टर अनुभव सिन्हा और एक्ट्रेस तापसी पन्नू जब भी...

सलमान खान के साथ नजर आएंगी चित्रांगदा सिंह

सुभाष शिरढोनकर जानी-मानी एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह की सबसे बड़ी विशेषता...

पर्सनल ब्रांडिंंग का डिजिटल रायतां

मैं 'आर्यन' उर्फ 'आर्यन ओपी' को समझा रहा था...

हिंदू मंत्रियों के जरिए रिश्तों को धोने की जुगत

पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में तारिक रहमान के रूप में...
spot_imgspot_img