Sunday, May 24, 2026
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मंडी में ही दोगुने रेट पर बिक रहा टमाटर, अधिकारी मौन

  • मंडी परिषद के अधिकारी कर्मचारियों के सामने ही खुलेआम बिक रहा टमाटर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: दिल्ली रोड स्थित नवीन सब्जी मंडी में मंडी परिषद के अधिकारियों के सामने ही सब्जी डेढ़ से दोगुना रेट पर थोक आढ़ती से मिलीभगत कर मासाखोरों द्वारा फुटकर में रेहड़ी ठेला वालों को बेची जा रही है। जिसमें फुटकर में सब्जी का रेट मंडी के थोक भाव से दो से ढाई गुणा हो जाता है।

खासकर सब्जी में देखा जाए तो टमाटर का डबल रेट मंडी के अंदर ही हो जाता है। जिसमें जिन किसानों के यहां से टमाटर आ रहा है। उन्हें इतना फायदा रेट का नहीं हुआ। जिसमें चंद घंटों में ही मासाखोरों द्वारा मुनाफा कमा लिया जाता है। इस संबंध में जब मंडी सचिव से बात की गई तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

शहर की दिल्ली रोड स्थित नवीन सब्जी मंडी में इन दिनों सब्जी के जो थोक के भाव हैं। उनका डेढ़ से दोगुना रेट मंडी के अंदर ही आढ़ती एंव मासाखोरों की सेटिंग के चलते बढ़ जाता है। उसके बाद वह फल एवं सब्जी खुलेआम बाजार में रेहड़ी एवं ठेला वालों द्वारा जो सब्जी की दुकान या फेरी लगाकर बेची जाती है तो उसका रेट ओर भी बढ़ जाता है। साफ है कि मंडी के अधिकारी यदि मंडी के भीतर थोक रेट में जो सब्जी आढ़Þती के द्वारा खरीदी जाती है।

उसको मासाखोरों के चंगुल से मुक्त कराकर सीधी रेहड़ी, ठेला एवं फुटकर दुकानदारों को बेची जाए तो बाजार में भी रेट कम हो सकेगा, लेकिन ऐसा नहीं कि आढ़ती एवं मासाखोर ही इस खेल में शामिल हों। सूत्रों की माने तो मंडी के अधिकारी एवं कर्मचारियों की बिना मिलीभगत के मंडी में मासाखोरों का मकड़जाल कामयाब नहीं हो सकता। जिसमें कहीं न कहीं मंडी परिषद के अधिकारी एवं

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कर्मचारी भी मंडी के अंदर डेढ़ से दोगुना रेट पर जो सब्जी फुटकर विक्रेताओं को बेची जा रही है, उससे अंजान नहीं है। आखिर वह आढ़ती एवं फुटकर विक्रेताओं के बीच के बिचौलिया, मासाखोर पर कार्रवाई क्यों नहीं करते? मंडी में टमाटर का थोक रेट यदि 70 रुपये प्रति किलो के हिसाब से चल रहा है तो वह मंडी के भीतर ही फुटकर विक्रेताओं को 150 रुपये प्रति किलो से अधिक के रेट पर मिलेगा। फिर फुटकर, रेहड़ी, ठेली विक्रेता उसे 175 से 200 रुपये तक बेचेगा।

मतलब थोक रेट के लगभग तीन गुना रेट पर लोगों को बाजार में टमाटर मिलेगा। कोमोवेश सभी सब्जी के रेट में मासाखोरों का खेल चल रहा है। जिसमें किसान के खेत से चली सब्जी मंडी जाते ही दोगुना रेट पर बेची जाती है। जो बाजार में जाते-जाते तीन गुना रेट तक हो रही ही है। मंडी के अधिकारी इस पर मौन बने हुए हैं।

सब्जियों के दाम बढ़ाते हैं मासाखोर

किसान के खेत से सब्जियां चलने और सब्जी मंडी में मासाखोर तक पहुंचने तक सब्जियों के रेट पांच प्रतिशत बढ़ जाते हैं। मासाखोर और दुकानदार तक पहुंचते ही उनके रेट डेढ़ से दो गुणा तक बढ़ जाते हैं। किसान सब्जी मंडी में जब अपनी सब्जियां लेकर जाता है तो उसकी सब्जी पर आढ़ती के पास पहुंचते ही उस पर पांच प्रतिशत आढ़त का कमीशन बढ़ जाता है। इसके बाद आढ़ती की दुकान से मासाखोर तक मात्र 10 मीटर की दूरी पर पहुंचते ही उस सब्जी के रेट डेढ़ गुणा पहुंच जाते हैं।

मंडी में जो थोक के भाव होते हैं। उसे आढ़ती खरीदकर फुटकर में अपनी मर्जी से बढ़े रेट पर बेच रहा है तो उसमें मंडी समिति कुछ नहीं कर सकती। मंडी आढ़ती एवं मासाखोर यदि मुनाफा कमा रहे हैं तो मंडी समिति का कोई इससे लेना-देना नहीं है। मंडी में जो रेट थोक के होते हैं, उसमें कुछ सब्जी अलग-अलग रेट की हो जाती है। यह रेट तय करने का अधिकार आढ़ती का है न कि मंडी समिति का। -विजन सिंह, सचिव मंडी समिति मेरठ।

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