- शिक्षा का उजाला फहराने के साथ ही बेटियों को भी आगे बढ़ा रहे कुछ शिक्षक
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं हैं, बस उन्हें जरूरत है तलाशने और तराशने की। हमारे शहर में भी ऐसी ही प्रतिभाओं को शिक्षकों, कोच ने तराशा तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर रही हैं। वहीं ऐसे भी बच्चे हैं जो आर्थिक तंगी के चलते स्कूल जाने में असमर्थ हैं,
लेकिन कई शिक्षकों ने उन्हें नि:शुल्क पुस्तकें, यूनिफार्म उपलब्ध कराई और शिक्षा दे रहे हैं। साथ ही शहर में कई ऐसे खिलाड़ी हैं। जिन्होंने खेल जगत में नाम रोशन किया। इनकी कामयाबी के पीछे इनके कोच का मुख्य योगदान है। शिक्षक दिवस के अवसर पर जनवाणी ने कुछ ऐसे शिक्षकों से वार्ता की।
मां का सपना पूरा कर रहे मधुसूदन
शहर के जूनियर हाईस्कूल कृष्णापुरी के प्रधानाध्यापक मधुसूदन कौशिक ने 2016 में जब स्कूल में चार्ज लिया तो यहां केवल 28 छात्र थे। हालत बहुत खराब थी। बच्चों के मिड-डे मील के बर्तन टूटे थे। बिजली जाने पर बच्चों का गर्मी से बुरा हाल था। उन्होंने अपने निजी खर्च से बर्तनों की व्यवस्था की। इनवर्टर लगवाया अब बिजली जाने पर क्लास में पंखे चलते रहते हैं। अपने संसाधनों से स्कूल में स्मार्ट क्लास शुरू की। उनका और स्टाफ का ही प्रयास रहा कि मंडलायुक्त ने स्कूल के बच्चों को खेल की किट प्रदान की। स्कूल में कैरम, क्रिकेट, फुटबाल आदि खेल का काफी सामान है।

स्कूल में लाइब्रेरी के अलावा साइंस लैब है। जहां मधुसूदन खुद बच्चों को पढ़ाते हैं। मधुसूदन नगर शिक्षक संघ के अध्यक्ष भी हैं। उनका कहना था कि 2010 में उनकी धर्मवती शर्मा इसी विद्यालय से रिटायर हुई थीं। उनकी भी इच्छा है कि उनका ये स्कूल आगे बढ़े उनकी राह पर चलकर वे भी इसके छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए प्रयासरत अब उनका प्रयास स्कूल के जर्जर भवन को ठीक है।
गरीब बेटियों को शिक्षा दिलाना ही नीरा का उद्देश्य
समाज में बेटियों को उपेक्षा का दंश न झेलना पड़े इसके लिए बेटियों को काबिल और उनमें देशभक्ति का जज्बा जगाने के लिए मल्लू सिंह आर्य कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य नीरा तोमर कर रही है। एक और जहां वह गरीब और निर्धन बेटियों को अपने पैसों से निशुल्क शिक्षा प्रदान करा रही है वही वह बेटियों को स्वाभिमानी बनाने का प्रयास भी कर रही है। बारहवीं की पढ़ाई पूरी करते ही नीरा की शादी हो गई।
शादी के बाद उन्होंने पति के सहयोग अपनी पढ़ाई पूरी की। बेटियों को शिक्षित कर उनके पैरों पर करने का सपना आंखों में पालने वाली नीरा छह बेटियों को गोद लेकर उन्हें शिक्षित और उनकी देखभाल कर रही है और दस लड़कियों की पढ़ाई, कपड़े और किताबों का खर्च भी उठा रही हैं। नीरा कहती है कि वह एक गांव गोद लेना चाहती है, जहां की एक एक बेटी को शिक्षित कर वह एक मिसाल कायम करना चाहती हैं।
सात किताबें लिख चुकी हैं मृदुला शर्मा
5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस के अवसर पर शास्त्री नगर स्थित इस्माइल गर्ल्स इंटर कालेज प्रधानाचार्य डा. मृदुला शर्मा को डॉ. मृदुला शर्मा को राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उनको यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान और उनके कुशल प्रशासनिक कौशल के लिए दिया जा रहा है। डा. मृदुला शर्मा ने मेरठ विश्वविद्यालय से हिंदी में एमए और पीएचडी की है।
वहीं उन्होंने सात किताबें भी लिखी हैं, जिनमें कोरोना काल प्रकृति का प्रकोप, हम और हमारे बच्चे, जीवन प्रेरक कहानियां, नारी शिक्षा एवं रोजगार जैसे शीर्षक शामिल हैं। उन्होंने यूपी बोर्ड पाठ्यक्रम के लिए नैतिक शिक्षा, खेल और शारीरिक शिक्षा पर भी दो किताबें लिखी हैं। डा. मृदुला शर्मा के कार्यकाल के दौरान विद्यालय में लगातार परीक्षा परिणाम 63 प्रतिशत से निरंतर 100 प्रतिशत तक बेहतर हुआ है।
स्कूल ने रसायन विज्ञान, भौतिकी और जीव विज्ञान के लिए तीन अच्छी तरह से सुसज्जित विज्ञान प्रयोगशालाओं के साथ-साथ दो कंप्यूटर प्रयोगशालाएं भी स्थापित की हैं। जिस पर मृदुला शर्मा ने बताया कि स्टूडेंट्स के लिए भारतीय कलाओं में रुचि बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय त्योहारों, शिक्षक दिवस और भारतीय समारोहों के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम, रंगोली प्रतियोगिताएं और पोस्टर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।

