- आउटरों को सरकारी दफ्तरों से बाहर किए जाने का फरमान
जनवाणी संवादाता |
मेरठ: योगी सरकार के कई सरकारी विभागों की फाइलों की गोपनीयता खतरे में है। ऐसा नहीं कि इस खतरे से सीएम कार्यालय व लखनऊ में बैठने वाले अन्य अफसर इससे अंजान हों। सरकारी फाइलों पर खतरे की आशंका के चलते ही सचिव राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ अनिल कुमार यादव ने मंडलायुक्त व जिलाधिकारी को 29 अगस्त को भेजे पत्र में मंडल, कलक्ट्रेट, तहसील कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों निजी कार्मिक/प्राइवेट व्यक्तियों से कार्य न कराए जाने का संज्ञान लेने का निर्देश दिया है।
सचिव राजस्व परिषद ने इस पत्र में कहा है कि अवगत कराना है कि शासन/परिषद के संज्ञान में आया है कि प्रदेश के कतिपय मंडल, कलक्ट्रेट, तहसील कार्यालय में सरकारी कर्मचारियों द्वारा बाहरी व्यक्तियों (निजी कर्मियों) के सहयोग से शासकीय/विभागीय कार्य कराया जा रहा है तथा ऐसे व्यक्तियों द्वारा भ्रष्टाचार की अनियमितताएं किए जाने की शिकायतें भी शासन/परिषद को निरंतर प्राप्त हो रही हैं।

सचिव राजस्व परिषद ने इस कृत्य को अत्यंत आपत्तिजनक करार दिया है। सचिव राजस्व परिषद ने मंडलायुक्त व जिलाधिकारी को कहा है कि अधिनस्थ समस्त अधिकारियों को निर्देशित करने का कष्ट करें कि किसी मंडल, कलक्ट्रेट, तहसील कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों (निजी कार्मिक/प्राइवेट व्यक्तियों) से किसी भी दशा में कार्य न कराया जाए।
ऐसी शिकायतों का संज्ञान में आने पर उन्हें गंभीरता से लिया जाएगा तथा संबंधित अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी, जिसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी होंगे। मेरठ के सरकारी महकमों की बात की जाए तो आउटर के मामले में सबसे ज्यादा बदनाम जिला आपूर्ति कार्यालय है।
आदेश के बावजूद हैं डटे
एक ओर राजस्व परिषद के सचिव के आउटर को लेकर सख्त आदेश वहीं दूसरी ओर जिला आपूर्ति कार्यालय में आउटर का बोलबाला नजर आता है। एक जानकारी के अनुसार डीएसओ के तहसील सरधना में सुनील कुमार व सचिन, मवाना तहसील में नौशाद, प्रवीन, रिंकू व भाटी, तहसील सदर में हाशिम व अभिषेक, केसरगंज एरिया सेकेंड विशाल त्यागी, एरिया थर्ड केसरगंज दीपक व हीरा लाल बिल्डिंग में अंकित का नाम खासा चर्चा में है। इस संबंध में डीएसओ विनय कुमार से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से काल रिसीव नहीं की गयी।
नकल मिलने पर विद्यालय की मान्यता होगी रद्द
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद यानि यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा को नकलविहीन कराने को लेकर गंभीर है। शासन की ओर से भी साफ कर दिया गया है कि अगर नकल हुई तो परीक्षा केंद्र को डिबार करने की बजाए उसकी मान्यता ही रद कर दी जाए। आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि इसबार नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए ऐसे केंद्र बनाए जाए,

जिनमें सीसीटीवी समेत अन्य जरुरी व्यवस्थाएं होनी चाहिए साथ ही परीक्षा केंद्र से 200 मीटर की परिधि में केवल परीक्षा संचालन से जुड़े कर्मियों का ही प्रवेश मान्य होगा। आॅनलाइन परीक्षा केंद्र निर्धारण की सफलता डीआईओएस द्वारा किए जाने वाले स्थलीय गुणवत्ता पर निर्भर है। इतना ही नहीं किसी अन्य अधिकारी द्वारा कराया गया सत्यापन मान्य नहीं होगा।
संगीन धाराओं में होगा मुकदमा दर्ज
अगर किसी ने नकल कराई तो कक्ष निरीक्षक,प्रधानाचार्य और स्कूल प्रबंधक के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज होगा। वहीं परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी देने वाले कर्मचारियों के पास पहचान पत्र होना अनिवार्य होगा और जो केंद्र सामूहिक नकल के लिए बदनाम रहे है उन्हें परीक्षा केंद्र न बनाने के आदेश भी जारी किए गए है।

बारहवीं में हिंदी सामान्य और हिंदी साहित्य की परीक्षा एक साथ नहीं होगी। इसके लिए तिहाई केंद्रों की संख्या घट जाएगी। जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार का कहना है कि केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया आॅनलाइन ही होगी। शासन के आदेशों के अनुसार ही केंद्र निर्धारण कार्य किया जाएगा।

