Tuesday, May 26, 2026
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जिले में बढ़ रहा बुखार का कहर, विभाग सुस्त

  • मलेरिया, टाइफाइड और डेंगू के मरीजों में हो रहा दिन-प्रतिदिन इजाफा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जिले में इन दिनों बुखार का कहर बढ़ता ही चला जा रहा है। जिसमें डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड़ से जिले के सैकड़ों मरीज पीड़ित हैं। इस बाबत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति में व्यस्त हैं। सरकारी आंकड़ों में डेंगू मलेरिया और डाइफाइड बुखार के मरीजों की संख्या काफी कम दर्शाई जा रही है। मरीजों को सरकारी हास्पिटलों में उचित सुविधा नहीं मिल पा रही है। सरकारी हास्पिटलों में सुविधाओं के अभाव के चलते अधिकांश मरीज प्राइवेट चिकित्सकों से अपना इलाज कराने के लिए मजबूर हैं। प्राइवेट हास्पिटलों में बुखार के काफी संख्या में मरीज भर्ती हैं।

बता दें कि जिले में इस वक्त गंभीर बुखार ने अपने पैर जमा रखे हैं। बुखार से जिले के सैंकड़ों मरीज पीडित हैं। जिनमें अधिकांश रुप से डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड़ के मरीज शामिल हैं। ब्लाक स्तर, नगर पंचायत स्तर एवं ग्राम पंचायत स्तर पर स्थित सरकारी चिकित्सालयों के अलावा जिला चिकित्सालय एवं मेडिकल में स्वास्थ्य सेवाओं का काफी अभाव है। मरीजों को यहां डाक्टरों द्वारा न तो उचित सलाह मिल पा रही है और न ही अच्छी दवाइयां दी जा रही हैं। जिसके चलते मरीजों को बिमारी में कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है।

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स्वास्थ्य विभाग में सुविधाओं के अभाव के कारण जिले के अधिकांश मरीज प्राइवेट चिकित्सकों को महंगी फीस देकर इलाज करा रहे हैं। गंभीर बुखार के मरीजों को परिजनों द्वारा प्राइवेट हास्पिटलों में भर्ती कराया गया हैं। उधर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में ब्लाक, नगर पंचायत व ग्राम पंचायत स्तर पर न तो मच्छरों को कंट्रोल करने के लिए कोई प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं और न ही एंटी लारवा स्पे्र कराई जा रही है। जिसके चलते जिले में टाइफाइड, मलेरिया और डेंगू के मरीज दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही चले जा रहे हैं। उधर स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर इस बाबत सब कुछ जानने के बाद भी मौन साधे हुए हैं। वहीं इस बारे में सीएमओ डा. अखिलेश से वार्ता करने की कोशिश की तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

मुर्गा-मीट का अवशेष फेंका जा रहा नाले में

मेरठ: शहर में बिना नगर निगम एवं पशुपालन विभाग से लाइसेंस के सेटिंग के बूते पर शहर में सैकड़ों की संख्या में मुर्गा मीट शॉप खुलेआम चल रही है। जहां एक तरफ मीट शॉप के लिए लाइसेंस नहीं लेने से निगम निगम को राजस्व की क्षति हो रही है। वहीं दूसरी तरफ कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से ही इस तरह की मीट की दुकानों का संचालन हो रहा है। इन मीट की दुकानों से निकलने वाले वेस्टेज के निस्तारण की भी कोई समुचित व्यवस्था निगम की तरफ से नहीं कराई गई।

जिसमें मुर्गा एवं अन्य मीट शॉप संचालन वेस्टेज को नालों में बहा देते हैं। जिसमें जहां इस वेस्टेज से नालों के चोक होने की स्थिति बन जाती है। वहीं, दूसरी तरफ वह नालों के दूषित पानी को और भी प्रदूषित करते हैं। जिसके चलते नालों के आसपास दुर्गंध उठने लगती है और बीमारी फैलने का खतरा भी बन जाता है।

शहर में मीट की आपूर्ति के लिए नगर निगम एवं पशुपालन विभाग की तरफ से कोई स्लाटर हाउस की अनुमति नहीं दी गई है। जिसमें बिना स्लाटर हाउस के ही प्रतिदिन काफी संख्या में भैंस एवं अन्य पशुओं का कटान खुलेआम किया जा रहा है। जिस पर नगर निगम के अधिकारियों के द्वारा कोई ठोस कार्रवाई अब तक अमल में नहीं लाई जा सकी है। जिसमें शहर में मीट की सैकड़ों की संख्या में दुकाने खुली हैं। जिसमें मुर्गा-बकरा एवं अन्य पशुओं का मीट भी खुलेआम बेचा जाता है। जहां एक तरफ बिना लाइसेंस के ही दुकानों का अवैध तरीके से संचालन किया जा रहा है

तो जब निगम ने दुकानों के संचालन की अनुमति नहीं दी तो फिर मुर्गा मीट व अन्य दुकानों के वेस्टेज के निस्तारण की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं की। जिसके चलते मुर्गा मीट दुुकान के संचालकों के द्वारा मुर्गा व अन्य जानवर को हालल करने के बाद उसका जो वेस्टेज पंजे व पंख आदि का निस्तारण भी सही तरह से नहीं कर रहे हैं। जिसमें वह उस वेस्टेज को नालों में बहा देते हैं। जिसमें प्रतिदिन भारी मात्रा में मीट का वेस्टेज नालों में बहा दिया जाता है। जिसमें गलत तरीके से डाले गए इस वेस्टेज से जहां एक तरफ नालों के चोक होने की समस्या बन जाती है।

वहीं दूसरी तरफ नालों में यह वेस्टेज जब सड़ जाता है,तो नालों के आसपास रहने वाले लोगों का जीना दुर्गंध से दुभर हो जाता है। जिन नालों में वेस्टेज डाला जाता है, उनके आसपास रहने वाले लोगों के साथ ही मार्ग से होकर गुजरने वाले राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस मामले में नगर निगम एवं पशुपालन विभाग जोकि दोनों ही विभागों से पशु एवं मुर्गा मीट काटन एवं बेचने की अनुमति जारी करने का मामला जुड़ा है, दोनों ही विभाग इस गंभीर समस्या की तरफ से आंखे मूंदे बैठे हैं।

जबकि जहां एक तरफ निगम एवं पशुपाल विभाग से पशुओं के कटान की अनुमति नहीं लेने के चलते निगम के राजस्व को भी नुकसान होता है। वहीं, दूसरी तरफ इस तरह से वेस्टेज को नालों में बहाने से नाले चोक होने व दुर्गंध से बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। लोगो का कहना है कि मामला निगम के अधिकारियों से जुड़ा हो या फिर पशुपालन विभाग से शहर की जनता को निजात दिलवानी चाहिए।

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