जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में बढ़ते विरोध और राजनीतिक हलचल के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने 26 दिनों से जारी अनशन को समाप्त कर दिया। गुरुवार देर रात करीब 12:30 बजे उन्होंने सरकार की ओर से मिले लिखित आश्वासन के बाद यह फैसला लिया।
सोनम वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह सहित लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेता उनसे मिलने पहुंचे थे। इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने पत्र लिखकर उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की थी। सांसदों और मंत्रियों ने भरोसा दिलाया कि NEET पेपर लीक और देश की परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर संसद में व्यापक चर्चा कराई जाएगी।
दो दिनों की बातचीत के बाद बनी सहमति
वांगचुक ने बताया कि पिछले दो दिनों से सरकार और उनके बीच लगातार बातचीत चल रही थी। उन्होंने सरकार से लिखित आश्वासन की मांग की थी, जिसके चलते उन्हें दो दिन अतिरिक्त अनशन जारी रखना पड़ा। आखिरकार सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया।
सरकार ने दिए तीन बड़े लिखित आश्वासन
सरकार की ओर से वांगचुक को तीन प्रमुख बिंदुओं पर लिखित आश्वासन दिया गया—
- जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले तथा 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई एफआईआर या कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।
- NEET पेपर लीक प्रकरण से प्रभावित और जान गंवाने वाले 20 से अधिक छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।
- संसद में परीक्षा प्रणाली में सुधार, शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर विस्तृत चर्चा कराई जाएगी।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर क्या बोले वांगचुक?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के सवाल पर सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार इस संबंध में कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दे सकी। उन्होंने कहा कि उनके सामने दो ही विकल्प थे—या तो अनिश्चितकाल तक भूख हड़ताल जारी रखकर अपनी जान जोखिम में डालें, या आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए अनशन समाप्त करें। उन्होंने कहा कि पिछले कई हफ्तों से हजारों लोग उनसे आग्रह कर रहे थे कि संघर्ष जारी रखने के लिए उनका स्वस्थ और जीवित रहना जरूरी है।
“धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा न देना सरकार के लिए नुकसानदायक”
वांगचुक ने कहा कि यदि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दे देते तो सरकार को हो रहे राजनीतिक नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मांग यह थी कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई मामला दर्ज न हो, क्योंकि एक एफआईआर किसी युवा का भविष्य प्रभावित कर सकती है।
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों पर संतोष जताया और आंदोलन को समर्थन देने वाले देशभर के लोगों का आभार व्यक्त किया।

