Thursday, March 26, 2026
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गांधी जी के स्टैच्यू ने करा दी निगम की फजीहत

  • कबाड़ के जुगाड़ से तैयार स्टैच्यू में भी भ्रष्टाचार की ‘बू’
  • लखनऊ तक मामला पहुंचा तो आनन-फानन में हटवाया गांधीजी का स्टैच्यू
  • मामले की सही तरह से जांच हो तो गिर सकती है, कई पर गाज

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: महात्मा गांधी जयंती के मौके पर गत दो अक्टूबर को कबाड़ के जुगाड़ से जो लाखों रुपये कीमत से स्टैच्यू तैयार कर लगवाई गई थी। उसने निगम के अधिकारियों की खूब फजीहत करा दी। निगम के अधिकारियों द्वारा कहा गया था कि इस तरह की प्रदेश की पहली स्टैच्यू तैयार कर लगाई गई है। जोकि प्रदेश में अभी तक कहीं नहीं लगी, लेकिन एक सप्ताह भी नहीं हुआ कि गांधी जी के चेहरे के स्टैच्यू को भद्दा बताते हुए प्रतिक्रियाएं शुरू हुई

तो मामला चर्चा का विषय बन गया, जिसमें यह मामला लखनऊ तक जा पहुंचा। कमिश्नर एवं लखनऊ के अधिकारियों ने मामले में संज्ञान लेते हुए तत्काल स्टैच्यू को वहां से हटवाने के लिए निगम के अधिकारियों से कहा गया, जिसके बाद निगम की टीम वहां पहुंची और आनन-फानन में स्टैच्यू को हटवाया गया। जहां एक तरफ गांधीजी के चेहरे के स्टैच्यू को भद्दा मजाक बताया गया। वहीं, जितनी लागत दशाई गई है, उससे कहीं न कहीं भ्रष्टाचार की ‘बू’ भी आ रही है।

नगर निगम के अधिकारियों द्वारा भले ही धरातल पर कोई विकास की योजना का क्रियानव्यन सही तरह से न किया जाये, लेकिन निगम के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर अलग-अलग प्रयोग जरूर किए जाते हैं, ताकि नगर निगम द्वारा जो प्रयोग किया गया है। उसकी सफलता के चर्चे शहर में ही नहीं बल्कि समूचे प्रदेश व देश में हों, लेकिन अब तक मुख्य रूप से जितने भी प्रयोग नगर निगम के अधिकारियों द्वारा किए गए, उनमें निगम की फजीहत के सिवाय कुछ हाथ नहीं लगा।

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अब तक जितने भी प्रयोग में निगम की फजीहत हुई उनमें सबसे बड़ी फजीहत कमिश्नरी चौराहा के सेल्फी प्वाइंट पर निगम द्वारा एक लाख रुपये से अधिक की लागत से कबाड़ के जुगाड़ से तैयार कराई गई महात्मा गांधी की स्टैच्यू ने करा दी। निगम का ही लोहे का कबाड़ निगम के ही कारीगर फिर निगम द्वारा एक लाख रुपये से अधिक का धन किस चीज पर खर्च किया गया, वह समझ से परे हैं, लेकिन निगम के अधिकारियों के द्वारा इस स्टैच्यू को लगवाने के दौरान यह कहते हुए थका नहीं जा रहा था कि प्रदेश में इस तरह की यह पहला स्टैच्यू कबाड़ के जुगाड़ से तैयार करके लगवाया गया है।

ताकि लोग कबाड़ के जुगाड़ से प्रेरणा लेकर इस तरह से स्टैच्यू भी तैयार कर सकते हैं। जिस समय इस स्टैच्यू को लगवाया जा रहा था, तब महात्मा गांधीजी जैसा चेहरा स्टैच्यू का दिखाई नहीं लग रहा था। खुद निगम कुछ अधिकारियों ने भी नगरायुक्त एंव अपरायुक्त से भी इस संबंध में कहा गया, लेकिन उस दौरान वाहवाही लूटने के चक्कर में उस बात को अनसुना कर दिया गया, लेकिन मामला धीरे-धीरे चर्चाओं में रहा और मामला लखनऊ तक जा पहुंचा। जिसमें स्टैच्यू भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

कमिश्नर एवं लखनऊ के अधिकारियों ने मामले में संज्ञान लिया तो सोमवार को निगम के अधिकारियों की नींद टूटी और स्टैच्यू को वहां से हटवाते हुए जिन वाहनों में कूड़ा आदि ढोया जाता है, उस ट्रैक्टर-ट्रॉली में लदवाकर अन्य जगह पर भिजवा दिया गया। जिसमें अपर नगरायुक्त प्रमोद कुमार ने कहा कि इस स्टैच्यू को प्रयोग के लिए लगाया गया था,

ताकि शहर की जनता के सुझाव प्राप्त हो सकें कि यह कैसा प्रयोग हैं। उन्होंने बताया कि सही सुझाव भी आए और गलत भी, इस स्टैच्यू को ठीक कराकर अब दूसरी जगह लगाया जायेगा। वहीं सूत्रों की माने तो लखनऊ तक मामला पहुंचा तो आलाधिकारी इसको लेकर निगम के अधिकारियों से खासे नाराज है। इस मामले में वाहवाही लूटने वालों पर कार्रवाई हो सकती है।

गड्ढा भरने के लिए चलाई थी एम्बुलेंस, फ्लाप

नगर निगम द्वारा तीन माह पूर्व सड़कों में गड्ढों को भरने के लिए एम्बुलेंस सेवा शुरू की थी। जिसे प्रदेश का प्रथम सफल प्रयोग बताया जा रहा था कि मोबाइल पर कॉल करते ही एम्बुलेंस गड्ढों को भरने के लिए पहुंचेगी, लेकिन उक्त मोबाइल नंबर जो हेल्पलाइन नंबर के लिए थे, वह ही गलत जारी कर दिए। वहीं योजना पूरी तरह से फ्लाप हो गई। अब शहर से एम्बुलेंस पूरी तरह से गायब है। अब गड्ढों को भरने के लिए टेंडर छोडेÞ गए हैं।

25 लाख में खरीदी मशीन कबाड़ में हो रही तब्दील

नगर निगम द्वारा करीब 25 लाख रुपये से एक मशीन खरीदी गई थी, जोकि बच्चा पार्क के निकट जल निगम की जगह में खड़ी है। जिसमें कबाड़ को उस मशीन में जलाकर राख तैयार की जाती थी। जिसमें कबाड़ जलने के बाद प्रदूषण भी कम होने की बात कही जा रही थी, साथ ही जो राख निकलती थी, उससे र्इंट तैयार करने की बात निगम द्वारा कही गई, साथ ही इस प्रयोग को भी प्रदेश का पहला प्रयोग कहा गया था, लेकिन वह योजना भी पूरी तरह से प्लाप साबित हुई। निगम अधिकारी योजना शुरू करते हैं, वाहवाही लूटने को, जिसमें भ्रष्टाचार एवं उनकी दूरदर्शिता से कहीं न कहीं फजीहत हो जाती है।

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