- इस बार नवंबर माह की आमद के साथ ही विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों ने हस्तिनापुर वन्य जीव विहार की बूढ़ी गंगा नदी की झील, भीमकुंड झील, जलालपुर जोरा समेत गंगा के दलदले टापुओं पर डेरा डाल लिया
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: फरवरी के आखिर और मार्च के महीने में अपने-अपने देश लौट जाने की तैयारी कर रहे करीब 10 हजार प्रवासी पक्षियों की चहल-पहल से हस्तिनापुर सेंचुरी का माहौल बेहद खूबसूरत बना हुआ है इन परिंदों को देखने के लिए दिनभर लोगों का मेला लगा रहता है। इस बार नवंबर माह की आमद के साथ ही विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों ने हस्तिनापुर वन्य जीव विहार की बूढ़ी गंगा नदी की झील, भीमकुंड झील, जलालपुर जोरा समेत गंगा के दलदले टापुओं पर डेरा डाल लिया है।

हर साल आने वाले करीब 30 विभिन्न प्रजातियों के यह विदेशी मेहमान यहां लगभग चार माह तक वातारण को अपने कलरव से गुंजायमान करते रहते हैं। जिनमें पाइड एवोसेट, कोटन टील, गेडवेल, मलार्ड, नोर्दन स्वालर, नोर्दन पटेल, गागेर्नी, कामन पोचार्ड, टपटेड पोचार्ड समेत अन्य प्रवासी पक्षी शामिल होते हैं। बर्ड स्पेशलिस्ट डॉ. रजत भार्गव का कहना है कि उन्होंने अपनी टीम के साथ चार बार हस्तिनापुर सेंचुरी पहुंचकर यह आकलन करने का प्रयास किया कि परिंदों की संख्या कितनी रही होगी।
उनका अनुमान है कि इस बार करीब 10 हजार विदेशी मेहमानों ने हस्तिनापुर सेंचुरी क्षेत्र में अपना डेरा डाला है। उनका कहना है कि इन परिंदों की आवाजाही आसपास के क्षेत्र में भी बराबर बनी रहती है। इसी के साथ स्थानीय परिंदे भी उनके बीच घुल मिलकर रहते हैं। जिला वन अधिकारी राजेश कुमार और डा. रजत भार्गव का कहना है कि हर साल यहां पहुंचने वाले पक्षी हिमाच्छादित पोलियरटिक यूरोप, मध्य एशिया व साइबेरिया आदि देशों से हजारों किमी का सफर तय करके आते हैं।

इन देशों में सर्दी के मौसम में झीलें और समुद्र जम जाते हैं। वन विभाग के अनुसार विदेशी पक्षियों की पसंद का हर भोजन यहां झील में मौजूद रहता है। इस समय जैसे-जैसे मौसम गर्म होने लगा है, उसे देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि फरवरी के आखिर और मार्च के पहले सप्ताह में यह परिंदे अपने देश लौटना शुरू हो जाएंगे।

