- ऐलान के साथ ही सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रहने के निर्देश
- डीएम और एसएसपी स्तर के अफसरों की हाईलेवल बैठक में समीक्षा
- पुलिस प्रशासन के आलाधिकारियों की धर्म गुरुओं की साथ बातचीत
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) की आहट के मद्देनजर बजाए विरोध के पेपर तैयार रखने की सलाह दी गयी है। सूत्रों ने जानकारी दी है कि एक दिन पहले शहर भर के तमाम प्रमुख मस्जिदों में जुमे की नमाज के बाद कहा गया है कि सीएए को लेकर पैनिक करने की जरूरत नहीं है। यह ठीक है कि सीएए लागू होने जा रहा है, लेकिन बेहतर यह होगा कि अपनी नागरिकता से मुत्तालिक अपने तमाम पेपर तैयार रखें। सबसे बेहतर यही रहेगा। इन पेपरों में अपने पुरखों से संबंधित तमाम पुख्ता जानकारी जरूर शामिल रखें।
सड़क पर उतरने और विरोध को ना
नागरिकता संशोधन कानून लोकसभा चुनाव से पहले लागू किया जाना है। यह साफ हो गया है, इसलिए बेहतर यही होगा कि साल 2019 की तर्ज पर यदि सड़कों पर उतर कर विरोध करने का मंसूबा पाले बैठे हों तो दिल ओ दिमाग से इस बात को निकल दिया जाए। जम्मे की नमाज के बाद लोगों को सड़कों पर उतरकर विरोध करने से दूर रहने की भी सलाह दी गयी है। सीएए अब मुल्क में कानून बन गया है और कानून से ऊपर कोई नहीं।
रेड अलर्ट की हिदायत
सीएए के एलान के साथ ही पुलिस प्रशासन के अफसरों को रेड अलर्ट पर रहने की हिदायत दी गयी है। सूत्रों ने जानकारी दी है कि एक दिन पहले यानि बीते शुक्रवार को लखनऊ में हाई लेवल मीटिंग जिसमें मेरठ के पुलिस प्रशासन के दोनों आला अफसर शामिल रहे बताए जाते हैं, उसमें कहा गया है कि सीएए कानून बन गया है, इसको लागू किया जाना है। ये सब लोकसभा चुनाव से पहले होना है, लेकिन ध्यान रहे कि कानून व शांति व्यवस्था की स्थिति खराब न हो। गड़बड़ी करने वालों से सख्ती से निपटने को कहा गया है।
धर्म गुरुओं से संपर्क
साल 2019 में सीएए और एनआरसी के सवाल पर भड़की हिंसा के बुरे तजुर्बे के मद्देनजर यहां मेरठ में सीएए लागू होने से पहले ही शासन की हिदायतों के चलते सिस्टम से जुडेÞ अफसरों ने धर्म गुरुओं से संपर्क शुरू कर दिया है। उनके साथ मीटिंगों के सिलसिले जारी हैं, हालांकि यह बात अलग है कि इस प्रकार की बैठकें केवल मुस्लिम धर्म गुरुओं के साथ की जा रही हैं। वहीं, दूसरी ओर लोकसभा चुनाव से पहले ही सीएए लागू किए जाने के एलान के बाद एक वर्ग विशेष में इसको लेकर खासी बेचैनी देखी जा रही है। इस वर्ग के शिक्षित माने जाने तबके में अधिक सरगर्मी नजर आती हैं।
आज भी हरे हैं हिंसा के जख्म
सीएए और एनआरसी के विरोध में 20 दिसंबर 2019 को हुई हिंसा के जख्म आज भी ताजा हैं। इस हिंसा में छह की मौत हुई थी, हालांकि सिस्टम ने पांच की मौतें स्वीकार की थी। इनमें मेरठ के रहने वाले मोहसिन, आसिफ, जहीर, आलिम और दिल्ली के आसिफ के रूप में की गई थी। सीएए को लेकर एक बार फिर से हलचल है। साल 2019 में जिन्होंने अपनों को खो दिया सीएए का नाम आते ही उनके घाव फिर से हरे हो जाते हैं।
उस हिंसा की सबसे बड़ी और अहम बात यह थी कि हिंसा पर उतारू भीड़ के पीछे जो भी था, उसका चेहरे से आज तक सरकारी ऐजेन्सियां नकाब नहीं उतर सकी हैं। वो कौन था जिसने हिंसा को भड़काया और उस हिंसा में मेरठ के रहने वाले मोहसिन, आसिफ, जहीर, आलिम और दिल्ली के आसिफ की मौत सीधे गोली मारे जाने से हो गयी।
सब कुछ पूर्व नियोजित था
20 दिसंबर की हिंसा को वो मनहूस दिन आज भी जहन में ताजा है। उस दिन सीएए के विरोध में शहर में हुआ दंगा हुआ था। बवाल पूरी तरह पूर्व नियोजित नजर आता था। इसके लिए पूरी तैयारी के साथ बवाली सड़कों पर उतरे थे। तब कुछ सुरक्षा ऐजेन्सियों ने बताया था कि हिंसा कराने के लिए संभवत: भाड़े के लोग बुलाए गए थे। बाहरी लोग भी इस बवाल के पीछे थे, जो आगजनी, पथराव और फायरिंग आदि के लिए पूरी तैयारी के साथ आए थे।
मिल गया था इनपुट
तब हुए बवाल का इनपुट पुलिस-प्रशासन के पास भी था, लेकिन बवाली पुलिस फोर्स पर हावी नजर आए। पहले से इनपुट मिल जाने के बाद भी तब के अफसर काबू नहीं कर पाए थे। अचानक ही जुमे की नमाज के बाद नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने की तैयारी दो दिन से चल रही थी।
पुलिस-प्रशासन ने भी इसे लेकर एक वर्ग विशेष के जिम्मेदार लोगों से संपर्क साधते हुए विरोध प्रदर्शन न करने के लिए बैठकें की थीं, लेकिन इन सबके बीच लगातार इनपुट मिल रहा था कि एक बड़ा वर्ग जुमे की नमाज के बाद विरोध प्रदर्शन करेगा। हापुड़ रोड और हापुड़ चौराहा से भूमिया पुल के बीच तथा कोतवाली क्षेत्र में घंटाघर आदि क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन होगा।

