- गौरव हत्याकांड को लेकर दलितों का एसएसपी कार्यालय पर फूटा गुस्सा
- जानी और सरूरपुर पुलिस पर प्रेमिका की गुमशुदगी में फंसाने का आरोप
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: गौरव हत्याकांड को लेकर गुस्साएं डाहर के दलितों ने पुलिस कार्यालय पहुंचकर पुलिस के काम करने के तौर तरीकों की पोल खोलकर रख दी। मृतक गौरव के परिवार ने आरोप लगाया कि गांव के भाजपा नेता व हत्याकांड में शामिल युवती ललिता के परिजनों के इशारे पर पुलिसिया कहर उनके घर पर बरपा।
पुलिस के डर से परिवार के युवकों को खेतों में छिप कर रहना पड़ा। एक ओर तो गौरव का कोई सुराग नहीं मिल रहा था। वहीं, दूसरी ओर अपने प्रेमी मोहकम के साथ चली गयी ललिता को लेकर भी जानी व सरूरपुर पुलिस उन्हीं पर शक कर रही थी।
अपहरण कर हत्या का आरोप
पुलिस कार्यालय पहुंचे मृतक गौरव के परिजनों ने पुलिस को कठघरे में खड़ा कर दिया। गौरव के छोटे भाई सौरभ ने बताया कि गौरव के छोटे भाई सौरभ ने संवाददाता को बताया कि उन्हें जानकारी मिली कि एक बाइक से दो लोग बीच में गौरव को बैठाकर लेकर जा रहे हैं। वो बाइक अब पुलिस के कब्जे में है। जिस गौरव को ललिता के इशारे पर उसके प्रेमी व प्रेमी के दोस्त ने शराब पिला कर मार डाला,

परिजनों की मानें तो वह बोलने की क्षमता नहीं रखता था। इसके अलावा वह पढ़ा लिखा भी नहीं था। उसकी स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि परिजन उसको अकेले कहीं जाने नहीं देते थे। वह एक शख्स के पास ही मेहनत मजदूरी किया करता था।
चेहरा न देख पाने का मलाल
पुलिस कार्यालय पहुंची गौरव के परिवार की महिलाओं के गम व गुस्से को अच्छी तरह से समझा जा सकता था। उन्होंने बताया कि उन्हें सबसे ज्यादा इस बात का मलाल है कि आखिरी वक्त में गौरव का चेहरा तक नहीं देख पाए। पुलिस ने लावारिसों की तरह अंतिम संस्कार करा दिया। गौरव के छोटे भाई की नाराजगी जायज नजर आयी।
उन्होंने बताया कि शव बरामद होने के बाद उनके परिवार से कह दिया गया कि जो शव बरामद हुआ है उसकी शिनाख्त नोएडा से गायब एक युवक के रूप में कर ली गयी है जबकि शव तो गौरव का था। बाद में जब पुलिस ने कपडेÞ व फोटो दिखाए तो उससे शिनाख्त कर ली गयी।
एसएसपी की पीली पर्ची व आईजीआरएस का बनाया मजाक
परिजनों ने बताया कि गौरव की गुमशुदगी जब सरूरपुर पुलिस ने दर्ज नहीं की तो वो लोग गुमशुदगी दर्ज कराने को व गौरव का सुराग लगाए जाने के लिए एसएसपी के यहां फरियाद करने को पहुंचे। वहां से पीली पर्ची देकर कहा गया कि अब थाने में यह पर्ची लेकर चले जाओ कार्रवाई हो जाएगी।
परिजनों का आरोप है कि पीली पर्ची दिखाने के बाद भी सरूरपुर पुलिस के रवैये में कोई फर्क नजर नहीं आया। इसके अलावा सीएम के आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत की गयी थी। हद तो तब हो गयी जब आईजीआरएस पोर्टल पर संबंधित दरोगा ने झूठी रिपोर्ट सबमिट कर दी। दरोगा गांव में आकर झांका तक नहीं और पोर्टल पर रिपोर्ट में कह दिया कि गांव में जाकर मौका मुआयना किया। आरोप असत्य पाए गए।

