- पार्टी के नेता गोपनीय रूप से याकूब से कर रहे संपर्क
- दलित मुस्लिम का गठजोड़ तैयार करने की केमिस्ट्री
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: बहुजन समाज पार्टी लोकसभा में अपनी ताकत बनाने के लिए एक बार फिर दलित मुस्लिम की केमिस्ट्री पर काम करना चाहती है। इसके लिए मायावती पुन: मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट से पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री हाजी याकूब कुरैशी को चुनाव मैदान में उतार सकती है। इसके लिए याकूब कुरैशी से गोपनीय तरीके से पार्टी के नेता संपर्क कर रहे हैं। हालांकि याकूब कुरैशी बीमार हैं और फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं। क्योंकि पुलिस-प्रशासन पहले ही उन पर शिकंजा कस चुका हैं। जेल भी उन्हें जाना पड़ा था।
हाजी याकूब कुरैशी चर्चित मुस्लिम नेता हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे हकीमुद्दीन के परिवार के सदस्य हाजी याकूब कुरैशी ने राजनीति की शुरुआत नगर निगम से शुरू की। वह 1997 में सभासद चुने गए और डिप्टी मेयर बने। इसके बाद राजनीति की सीढ़ियां चढ़ते गए। नबी-ए-पाक का कार्टून बनाने वाले फ्रांस के कार्टूनिस्ट का सिर कलम करने 51 करोड़ का इनाम की घोषणा करने के बाद याकूब विदेशों तक में चर्चा का विषय बने। वह दो बार विधायक रहे और पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री रहे।
पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा ने याकूब को भाजपा के राजेन्द्र अग्रवाल के सामने चुनाव मैदान में उतारा था। याकूब ने राजेन्द्र अग्रवाल को कड़ी टक्कर दी थी। याकूब मात्र 4229 वोट से हारे थे। 2002 के विधानसभा चुनाव में हाजी याकूब ने खरखौदा सीट पर पूर्व मंत्री जयपाल सिंह को हराया था। 2007 के विधानसभा चुनाव में याकूब ने यूडीएफ पार्टी बनाई थी, लेकिन निर्दलीय चुनाव लड़ा था और उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता डा. लक्ष्मीकांत वाजपेई को शिकस्त दी थी। पिछले लोकसभा चुनाव हो या पिछला विधानसभा चुनाव हो, दोनों में बसपा का वोट बैंक बिखर गया था।

इसका लाभ भाजपा ने जमकर उठाया। मायावती लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी की सीटें बढ़ाने के लिए एक बार फिर दलित मुस्लिम गठजोड़ बनाने की जुगत में हैं। इसके लिए मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर वह किसी मुस्लिम प्रत्याशी को उतराना चाहती है, ताकि पुन: मुस्लिम वोट उसके पक्ष में आ जाए। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि बसपा हाजी याकूब को चुनाव मैदान में उतर सकती है। मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र में करीब 18 लाख मतदाता हैं। जिनमें करीब सवा पांच लाख मुस्लिम और करीब पौने चार लाख दलित वोट हैं।
अगर दोनों एकतरफा बसपा के हक में वोट डालते हैं, उसके प्रत्याशी की जीत को कोई रोक नहीं पाएगा। वैसे भी पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के राजेन्द्र अग्रवाल ने 586184 वोट हासिल किए थे, जबकि बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े हाजी याकूब ने 581455 वोट पाए थे। हालांकि 2014 के लोसभा चुनाव में भाजपा के राजेन्द्र अग्रवाल ने करीब पौने दो लाख वोटों से बसपा के उम्मीदवार शाहिद अखलाक को हराया था।
सूत्रों का कहना है कि याकूब को चुनाव मैदान में उतराने से गत दिनों याकूब पर प्रदेश सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की वजह से मुस्लिमों की हमदर्दी याकूब को मिलेगी, जिसका लाभ बसपा उठाना चाहती है। हाजी याकूब से गुपचुप तरीके से पार्टी के नेता संपर्क कर रहे हैं। हालांकि हाजी याकूब चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हो रहे। वह आजकल बीमार हैं। उनका आपरेशन हुआ है और वह आराम कर रहे हैं। हालांकि हाजी याकूब का कहना है कि वह बीमार हैं और किसी भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ेंगे और न ही उनकी पत्नी या पुत्र चुनाव लड़ेेंगे।
सपा की आज होने वाली बैठक में होगा नाम का ऐलान
समाजवादी पार्टी के लखनऊ कार्याल्य पर मंगलवार को होने वाली बैठक में मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट के उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया जायेगा। वैसे पूर्व विधायक योगेश वर्मा व मुखिया गुर्जर के बीच रस्साकशी है। अब बाजी किसके हाथ लगती है, यह कल दोपहर बाद तक स्पष्ट हो जायेगा। वैसे दोनों ही दावेदारों ने अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए अपने समर्थकों को लगा दिया है। रालोद से अलग हो जाने के बाद समाजवादी पार्टी में दावेदारों की संख्या बढ़ गई है।
पहले तो सपा के नेता इस उम्मीद पर खुलकर सामने नहीं आ रहे थे कि कहीं गठबंधन में सीट न चली जाये, लेकिन अब स्थिति साफ हो चुकी है तो अपनी जीत सुनिश्चित मानकर नेताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर भी यही हाल है। इस सीट से सरधना, मेरठ शहर व किठौर के समाजवादी पार्टी के विधायक भी टिकट पाने की जुगत में थे। लेकिन सपा अध्यक्ष ने स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया है कि वर्तमान विधायकों को अवसर नहीं दिया जायेगा। अब टिकट की फाइट दो प्रतिद्वंदियों में रह गई है।
इसमें किसका पलड़ा भारी बैठता है और किसके नसीब में इंतजार आता है। इसके लिए मंगलवार की दोपहर तक इंतजार करना है। वैसे पूर्व विधायक योगेश वर्मा व मुखिया गुर्जर दोनों ही अपने-अपने समर्थकों को इस बात के लिए लगाये हुए हैं कि उनका ही टिकट होना चाहिए। दोनों ही प्रबल दावेदार हैं तथा जातिगत आंकड़ों के हिसाब से भी दोनों की ही स्थिति मजबूत नजर आ रही है। मेरठ सीट को पहले फाईनल करने में कोई दुश्वारी न हो।
यही वजह है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बैठक से हस्तिनापुर, सरधना व सिवाल खास विधान सभा के पार्टी पदाधिकारियें को दूर रहने का संदेश भेजा है। इस बैठक में सिर्फ पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, वर्तमान विधायक, वर्तमान जिलाध्यक्ष व पूर्व जिलाध्यक्ष को ही बुलाया गया है। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी का कहना है कि बैठक पार्टी कार्यालय लखनऊ में सुबह 11 बजे से प्रारम्भ होगी।

